हमारे दिए गए संस्कार जाया नहीं गए – सविता गोयल
अरूण जी बार बार बरामदे का चक्कर लगा रहे थे । उन्हें इस तरह बेचैन देखकर उनकी बहू मीता पूछ बैठी , “क्या बात है पापाजी? आपको कुछ चाहिए क्या?” “नहीं…. बहू… वो … मैं बस यूं ही …. वैसे तनुज नहीं आया अभी तक आफिस से” बात घुमाते हुए अरूण जी बोले । … Read more