पर उपदेश कुशल बहुतेरे – डा. मधु आंधीवाल

  रमा काकी मोहल्ले की चलती फिरती विविध भारती थी । पूरे मोहल्ले की बहू बेटियों की खबर रखती थी । कुछ लोग तो उन्हें नारद मुनि कहते थे । प्रीति मि. शर्मा जी की छोटी बेटी थी । बड़ी बेटीऔर बेटे की शादी हो गयी थी । प्रीति बहुत समझदार और शिक्षित लड़की थी । … Read more

” परवरिश ”  – अनिता गुप्ता

शहर की पॉश कॉलोनी के एक बंगले के बाहर काफी गहमा-गहमी का माहौल है। पुलिस ने यहां पर दबिश दी है। बहुत समय से शिकायत आ रही थी कि, इस बंगले में कुछ ग़लत हो रहा है। लेकिन सबूतों के अभाव में पुलिस कोई कार्यवाही नहीं कर पा रही थी। अभी पिछले हफ्ते ही नई … Read more

मेरे दोनों बच्चे एक समान* – नताशा हर्ष गुरनानी

स्नेहा कहा जा रही हो? मम्मा अदिति से मिलने जा रही हूं इस समय जाने की जरूरत नहीं स्नेहा किससे बात कर रही हो? मम्मा मानसी से बस बहुत देर बात कर ली अब बन्द करो मोबाइल स्नेहा फ्राक के साथ लेगी पहनो हां मम्मा चलो रसोई में खाना बनाने में मेरी मदद करो राहुल … Read more

“शिक्षा भी संस्कार भी” – अनीता चेची

कनक अपने गांव की  पहली लड़की थी जो डॉक्टर बनी थी। कनक के माता-पिता  के साथ-साथ पूरे गांव को भी उस पर गर्व हो रहा था। डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद कनक के पिताजी ने कनक का विवाह  डॉक्टर लड़के से ही कर दिया ।लड़का भी कनक की भांति ही सुंदर और पढ़ा … Read more

एक थी नंगेली – कमलेश राणा

पढ़ने का बहुत शौक है मुझे,,इसी के चलते कल एक सामाजिक कुरीति ने ध्यान आकर्षित किया मेरा,दिल दहल गया उसे पढ़कर और उस कुरीति से मुक्ति दिलाने वाली महिला नंगेली के प्रति श्रृद्धा से नतमस्तक हो गई। मेरी नज़रों में नंगेली किसी वीरांगना से कम नहीं है बल्कि उसे पूजनीय कहना ही उचित होगा लेकिन … Read more

वियोग  का संयोग – विजया डालमिया

आरोही ….आरोही…. आरोही… कहकर आनंद ने उसे आवाज दी। पर वह आवाज बिना प्रत्युत्तर के उसी के पास फिर आ गई। आनंद बड़े गौर से आरोही को ही देख रहा था। उसकी आँखें …वे आँखें जिन्हें देखकर वह सब कुछ भूल जाता था। आखिर हुआ क्या है आरोही को? अचानक उसने कहा…” डॉक्टर आरोही” उसके … Read more

संस्कार शून्य  ! –  रमेश चंद्र शर्मा 

========= माता-पिता की तमाम चेतावनी और विरोध के बाद भी निधि अपने प्रेमी निमिष से शादी की जिद पर अड़ी रही । खुले माहौल और कॉन्वेंट शिक्षा में  पली-बढ़ी निधि आधुनिक विचारों और रहन-सहन को अपनाने लगी। आर्थिक स्थिति सामान्य होने के बावजूद भी निधि के पिता सुरेश उसकी हर इच्छा की पूर्ति करते। निधि … Read more

बेटियां संस्कारों के साथ ही आगे बढ़ पाएंगी – मंजू तिवारी 

क्योंकि यह पुरुष प्रधान समाज है।,,,, पापा सबके घर में केवल कनेक्शन है। आप भी घर में केवल का कनेक्शन करवा लो उसमें बहुत सारे देखने वाले प्रोग्राम आते हैं डीडी नेशनल पर कुछ भी नहीं आता,,,,, बोर हो जाते हैं।  बोर क्यों हो जाते हो,,,, समाचार लिया लगा लिया करो ,,, उसमें सारी दुनिया … Read more

बराबरी – संगीता अग्रवाल

” बहनजी हमें तो आपकी बेटी बहुत पसंद है बस लड़का लड़की दोनों आपस में बात कर लें फिर रिश्ता पक्का कर देते हैं आखिर जिंदगी तो इन्हे ही बितानी है साथ में !” लड़की देखने आई लड़के की मां स्मिता बोली। ” सही कहा बहनजी जाओ श्रीति ( लड़की) देवांश ( लड़का) को टैरेस … Read more

संस्कारहीन – गीता वाधवानी

शायद आप लोगों में से कुछ लोगों को यह विषय पसंद ना आए, लेकिन यह सच्चाई है कि कुछ लोग संस्कार हीन होते हैं और किसी की परवाह नहीं करते।  कहानी-मध्यम वर्गीय परिवार, धर्मशाला में शादी, यह वर्ग कहां कर पाता है बड़े-बड़े आलीशान होटलों में इंतजाम। निम्न वर्ग “हम गरीब हैं” कह कर छूट … Read more

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