हमदर्दी के पीछे का कड़वा सच – रश्मि प्रकाश

“रति देखो मुझे समझाने की कोशिश मत करो…वो सब क्यों हुआ किन परिस्थितियों में हुआ तुमने भी देखा…बेकार मेरे पास अपनासमय बर्बाद कर रही हो जाओ जाकर अपने पति को सँभालो…. उसे सँभालो इससे बेहतर है तुम ख़ुद को सँभालो…. ऐसी सोच वाले पतिके साथ रहने से क्या ही फ़ायदा जो तुम्हारे साथ ऐसा सलूक … Read more

कहीं आप के भी तो दो चेहरे नहीं? – भाविनी केतन उपाध्याय

” ला दे रितु, मैं बाकी की रोटियां सेंक लेती हूॅं जाकर अपने कमरे में आराम कर…. सुबह से लगी है काम में थक गई होगी ” काव्या ने प्यार और अपनेपन से अपनी देवरानी से कहा। ” नहीं दीदी,बस आठ दस रोटियां ही सेंकने की बाकी है मैं कर लूंगी, वैसे भी पूरा काम … Read more

ज़िंदगी-सुख दुःख का संगम। – रश्मि सिंह

सावित्री- सुनिए! राशि के पापा, राशि की दिखायी घर पर ना कराकर किसी मंदिर में कराए। राजेश जी- हाँ ये सही है, पर पहले राशि को तो तैयार करो चलने के लिए। राशि कमरे में आते ही- मैं किसी से मिलने नहीं जाऊँगी। सावित्री-बस इस बार चल मेरी गुड़िया रानी, और अबकी बार तू अपने … Read more

एहसान फरामोश – कमलेश राणा

सुजीत जी और विनय की बहुत अच्छी दोस्ती थी। सुजीत के पिताजी शहर के जाने माने डॉक्टर थे पैसा भी बहुत था ऐसा नहीं कि यह सब उनका ही कमाया हुआ हो उनके पुरखे भी काफी संपत्ति छोड़ गये थे लेकिन इसके बाद भी उन्हें और सुजीत को घमंड छू भी नहीं गया था बहुत … Read more

असली चेहरा – डॉ. अनुपमा श्रीवास्तवा

माँ को खुशी का ठिकाना नहीं था।वह अपने आँसू रोक नहीं पा रही थी। आखिर बहू-बेटे ने काम ही ऐसा किया था ! बहू ने रोजमर्रा के काम में आने वाले कुछ जरूरी समान साथ में दे दिये हैं।  अभी तक जिस नये घर का गृह प्रवेश भी नही हुआ था उसमें बेटा अपनी माँ … Read more

” मुखौटों की दुनिया ” – डॉ. सुनील शर्मा

मिसेज शर्मा आज किटी पार्टी में ख़ास मूड में थीं. सब को बताते हुए नहीं थक रही थीं कि उनके बेटे का रिश्ता बैंगलौर के एक उच्च व्यापारी घराने की लड़की से तय हो गया है. लड़की एम बी ए है तथा किसी विदेशी मल्टीनैशनल कंपनी में ऊंचे पद पर कार्यरत है. क्योंकि विवाह बैंगलौर … Read more

दोहरा चेहरा – समाज के लिए कुछ अपनों के लिए कुछ – संगीता अग्रवाल

” अरे तुम रीमा हो ना पर तुम यहाँ क्या कर रही हो ?” सुगंधा ने अपने कॉलेज की दोस्त को एक सस्ती कपड़ो की दुकान के बाहर खड़े देख पूछा। ” सुगंधा तुम अचानक यहां ?” रीमा खुश होते हुए अपनी दोस्त के गले लगती हुई बोली। ” हां वो मेरे पति का ट्रांसफर … Read more

कौन घर का चिराग़ – उषा गुप्ता

“बधाई हो ,आपको पुत्री रत्न प्राप्त हुआ है ।”डॉक्टर ने प्रसव के बाद आशा को बधाई देते हुए कहा।यह वह अस्पताल था जहाँ पुत्री के जन्म पर पूरे अस्पताल में मिठाई बाँटी जाती थी। आशा ने प्यार से बेटी का माथा चूम लिया।तभी सासु मां और पति अंदर आकर जोर-जोर से चिल्लाने लगे-” फिर से … Read more

वो एक माँ ही कर सकती है – ज्योति अप्रतिम

“अरे कहाँ हो भाई ।एक पखवाड़ा बीत गया है ,कोई बात नहीं हो पाई।सब ठीक तो है न !”मैंने किरण ,अपनी अभिन्न मित्र से फ़ोन पर पूछा। “हाँ ,सब ठीक ही है।” उदास सा स्वर सुन कर ही समझ आ गया कुछ तो दाल में काला है ! “स्पष्ट बताओ डिअर ! क्या हुआ ?”मैंने … Read more

लौटती जिंदगी – तृप्ति शर्मा

 छोटी आज सुबह से परेशान है ,बहुत प्यारी सफेद रंग की काली आंखों में मासूमियत और सब का प्यार पाने को लालायित। बच्चों का खिलौना, बच्चे कैसे भी उसके साथ खेलते वह कुछ भी ना कहती, सब के घर की रोटी की पहली हकदार छोटी। तीन बार मां बन चुकी थी पर उसका खुद का … Read more

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