अगले जन्म में मिलेंगे – मुकुन्द लाल
दशकों बाद जब विशाल अपने गांँव गया तो उसके कदम अनायास ही उस खंडहरनुमा भवन की ओर बढ़ गए। उसके समीप पहुंँचने पर पहले की तरह ही वह ध्वस्त विल्डिंग जो कभी खूबसूरत इमारत हुआ करती थी के पास से गुजरने वाले सोता के जल की कल-कल ध्वनि सन्नाटे को भंग कर रही थी। वह … Read more