दस्तक – अभिलाषा कक्कड़

हर रोज़ की तरह आज भी जब केतकी प्रात का स्नान करके जैसे ही बाथरूम से बाहर निकलने लगी अचानक से पैर अपने ही लापरवाही से गिराये एक छोटे से साबुन पर आ पड़ा । अचानक से शरीर का सन्तुलन बिगड़ गया, झटके से पैर फिसला और हादसे ने सम्भलने का मौक़ा भी नहीं दिया … Read more

एक रिश्ता ऐसा भी  –  उमा वर्मा 

मेरा बेटा बंटी आजकल कुछ खोया खोया सा रहता है ।एक दम चुप सा हो गया है ।मुझे बहुत चिंता हुई आखिर क्या बात है? बहुत पूछने पर बताया कि किंजल बहुत अच्छी है मम्मी ।मुझे उसकी बहुत चिंता होती है ।” कौन किंजल?” किसकी बात कर रहा है तू? मेरे आफिस में है।मेरी सीनियर … Read more

गोद लेने की सजा  –  के कामेश्वरी

मोहन और अपर्णा की शादी हुए दस साल हो गए थे लेकिन उनके बच्चे नहीं हुए थे। उन दोनों ने मिलकर कई डॉक्टरों के चक्कर काटे परंतु कोई फ़ायदा नहीं हुआ तब दोनों ने मिलकर यह फ़ैसला किया था कि वे एक बच्ची को गोद लेंगे । मोहन को लड़कियाँ पसंद थी इसलिए उनके घर … Read more

‘ पहल तो करें ‘ – विभा गुप्ता

   ” ये तू क्या कह रही नैना, विधवा का विवाह!जगहँसाई करानी है क्या? पिछली होली पर तुम लोगों ने उस पर रंग डाला,मैंने कुछ नहीं कहा,पर अब शादी..।हर्गिज़ नहीं।” अयोध्या बाबू तीखे स्वर में अपनी बेटी से बोलें तो नैना ने कहा, ” लेकिन पापा इसमें हर्ज़ ही क्या है? आखिर भाभी की अभी उम्र … Read more

हम लोग – देवेन्द्र कुमार

जय बड़ी बड़ी सीलबंद बोतलें टेम्पो से उतार रहा था। वह होटलों और घरों में बोतलबंद पानी पहुंचाने की नौकरी करता है।लोग समझते हैं कि नगर निगम द्वारा साफ़ पानी की सप्लाई नहीं होती, इसीलिए वे बाज़ार में बिकने वाले बोतलबंद पानी पर ज्यादा भरोसा करते हैं।तीन दुकानों में पानी की बोतलें पहुँचाने के बाद … Read more

आर्यन –   मधु झा

“”आर्यन की मम्मी आयी है””,,ये वाक्य सुनकर सुनीता हतप्रभ रह गयी ,,साथ ही हृदय के अंदर तक आहत हो गयी,,तो क्या आज तक भी स्नेहा के लिए मैं सिर्फ़ आर्यन की मम्मी तक ही सीमित हूँ,, शादी के पाँच साल बाद भी वो मुझे माँ क्या माँ के समान भी न समझ सकी,, हमेशा मस्त … Read more

कुछ ख्वाब अधूरे से.. – रीटा मक्कड़

अपने दौर की हर लड़की की तरह मैंने भी बहुत से सपने, बहुत से ख्वाब खुली आँखों से देखे थे…जो बस ख्वाब ही रहे उनको पंख कभी नही मिले। उम्र के इस पड़ाव पर आकर भी लगता है ..मन का एक कोना अभी भी खाली है..कुछ है जो अधूरा रह गया है..कुछ है जो छूट … Read more

विचारों में पीएचडी – बालेश्वर गुप्ता

लगभग प्रतिदिन समाचार आता कि आज चीन ने हमारी एक चौकी पर कब्जा कर लिया,आज दो चौकी हमारे हाथ से निकल गयी।सुनकर झल्लाहट होती,पर बेबबस थे।          मैं तब आठवीं कक्षा का विद्यार्थी था,1962 के अक्टूबर माह में ही चीन ने भारत पर आक्रमण किया था।लम्बी गुलामी और विदेशी शासन से बहुत संघर्ष के बाद आजादी … Read more

मदद – संगीता अग्रवाल 

स्मिता अपने बेटे के साथ बाज़ार से निकल रही थी बड़े बड़े शोरूम और उनमे एक से एक मन को लुभाने वाली चीजे। शोरूमो के शीशो मे सजे पुतले और उनको पहनाये कीमती कपड़े। शोरूमो मे भारी भीड़ ।  सब कितना खूबसूरत नज़र आ रहा है पर क्या सच मे ये खूबसूरत है इसका एक … Read more

कुम्हार – सीमा पण्ड्या 

आज एक विवाह समारोह में डाक्टर वसुधा से मुलाक़ात हुई, बहुत ही आत्मीयता से मिलीं  मेरे पूरे परिवार से।   बच्चे क्या कर रहे हैं? भविष्य में क्या करना चाहते हैं सब पूछा। बच्चों और पत्नी उनके व्यक्तित्व और आत्मीयता से बहुत प्रभावित हुए ।बच्चे बोले-“लगा ही नहीं इनसे मिलने पर कि पहली बार मिल रहे … Read more

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