अपने लोग – कंचन श्रीवास्तव
आज बेटे की बात सोच मैं भीतर से टूट गई,और सोचने लगी। यकीनन आज के बच्चे ‘ जहां हम आज भी भावनाओं में उलझे हुए हैं जो भी दो शब्द प्यार से बोल दे, उसी के हो जाते हैं ।चाहे वो अपना हो या पराए’ बहुत प्रैक्टिकल है। और सही भी है आज में जीते … Read more