हिम्मत – बेला पुनिवाला

     सुषमा अभी सिर्फ १७ साल की ही थी, मगर कहते है ना, कि ” लड़कियांँ वक़्त से पहले ही जवान हो जाती है,” वैसे ही सुषमा का यौवन दिखने में २० साल की लड़की जैसा था और तो और वह दिखने में भी पहले से ही बहुत सुंदर थी, एक ही बार में किसी का … Read more

स्वाभिमान – कमलेश राणा

कार गांव की सड़क पर सरपट भागी जा रही थी और उससे भी अधिक तेजी से विचारों का कारवां मेरे दिमाग में दौड़ रहा था। मेरी यादों में गांव की तस्वीर बिल्कुल वैसी ही थी जैसी 15 साल पहले मैं यहाँ आई थी । आज बहुत दिनों बाद गांव आना हुआ जीवन की आपाधापी में … Read more

रिटर्न गिफ्ट – विजया डालमिया 

आज आरना की बर्थडे पार्टी थी ।पूरा बंगला खचा-खच शहर के नामी-गिरामी रइसों  से भरा था। आरना और अनूप दोनों बेसब्री से अंजली का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही अंजली आई सबकी नजरें उस पर जम कर  रह गई ।व्हाइट स्लीवलेस गाऊन में वह किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। कुछ देर … Read more

जाग उठा स्वाभिमान – गोमती सिंह

—रेखा इकहरे बदन की गौर वर्ण की बहुत ही खुबसूरत गांव के शांत वातावरण में पली बढी  लड़की थी । एक विवाह समारोह में उसकी खूबसूरती देखकर ही उसे एक बड़े शहर के रहनेवाले परिवार वालों ने अपनें मुंह से उसके माता-पिता से उसका हाथ मांग लिया था । आनन फानन में विवाह हो गया … Read more

कौन तुम्हें यूं प्यार करेगा – रजनी श्रीवास्तव “अनंता”

“क्या तुम मुझसे प्यार नहीं करती?” मीरा का हाथ अपने हाथों में लेकर समीर ने थोड़ा उदास होते हुए पूछा। “करती हूं, तुमसे कौन प्यार नहीं करेगा? तुम एक बेहतरीन इंसान हो!”  मीरा ने प्यार से समीर की तरफ देखा और धीरे से अपना हाथ छुड़ाते हुए बोली। “मगर समीर मैं खुद से बहुत ज्यादा … Read more

मत कुचलो स्वाभिमान – ऋतु अग्रवाल 

  अनीता आज बहुत खुश थी। कोरोनावायरस में लगा लॉकडाउन समाप्ति पर था। यह छह-सात महीनों का लंबा अंतराल उसने कैसे काटा है, वहीं जानती है। लॉक डाउन के चलते लोगों ने अपने घरेलू सहायकों को सेवानिवृत्ति दे दी थी। कोई भी अपने घर में बाहरी व्यक्ति को प्रवेश की अनुमति देकर खतरे में नहीं आना … Read more

 जब तक जियो स्वाभिमान के साथ जियो –   संगीता अग्ग्र्वाल

क्या बात है स्मिता जी आप आजकल पार्क नहीं आ रहीं ?” नंदिता ने अपनी पार्क में मिलने वाली मित्र के घर आकर पूछा। ” बस नंदिता जी थोड़ा तबियत नासाज चल रही आजकल !” स्मिता ने बुझे स्वर में कहा। ” हाँ थोड़ा मौसम और थोड़ा उम्र का तकाजा भी तो है मेरी तबियत … Read more

अभी तो बेटी बाप की है। –  अनु अग्रवाल

“ये लड़की भी न………ब्याह को बस कुछ ही दिन रह गए हैं……और ये अभी तक घोड़े बेचकर सो रही है……भगवान जाने क्या होगा इसका तो”- सुलक्षणा जी सुबह-सुबह गौरी के कमरे की खिड़की खोलते हुए बोले जा रहीं थीं। “माँ मैं ये शादी नहीं कर सकती”-जैसे ही गौरी के ये शब्द सुलक्षणा जी के कान … Read more

सम्मान की सूखी रोटी  –  सविता गोयल

बहू……., तेरे ससुर जी की खिचड़ी में थोड़ा और घी डाल दे ….. वो ऐसी लुखी खिचड़ी नहीं खा पाते। आशा जी प्यार से समझाते हुए अपनी बहू संध्या से बोलीं। संध्या ने कुढ़ते हुए एक चम्मच घी खिचड़ी में डाल दिया लीजिए.. डाल दिया घी… और भी कुछ डालना हो तो बता देना… वैसे … Read more

स्वाभिमान – सरिता सिंह 

#स्वाभिमान “समझते क्या हो प्रकाश ? क्या मेरे प्रेम,मेरे विश्वास की कोई कीमत नहीं ,तुम्हारे लिए?” “क्या नहीं किया मैंने तुम्हारे लिए?अपने घर वालों तक से दुश्मनी ले ली। सबकुछ किया तुम्हारे लिए।क्या इस दिन के लिए?” सलोनी ये कहकर रोने लगी। प्रकाश सलोनी को पहली बार ऊंची आवाज़ में बातें करते देख तिलमिला सा … Read more

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