ममता – अभिलाषा कक्कड़

पंडित बृजमोहन जैसे ही नहा कर आये तो बहुत ही स्वयं को असहज सा महसूस करने लगे। पत्नी मंगला ने पूछा कि क्या हुआ तो कहने लगे कि कुछ अच्छा नहीं लग रहा जी बहुत घबरा रहा है । तो आज की सारी पूजा कैंसल कर दीजिए !!माना कि शादियों का समय चल रहा है … Read more

आपका एहसान नहीं भूलेंगे – मीनाक्षी सिंह

हुआ कुछ यूँ कि रीना के पतिदेव सूरज अपने 6 साल के बेटे विनय  को उसका स्कूल ऑफ़ होने के बाद  अपनी एक्टिवा से लेकर आ रहे थे ! तभी नन्हा विनय गोलगप्पे खाने की ज़िद करने लगा ! रीना ने भी सूरज से कहा चलो ,,खिला देते हैँ इसका मन हैँ तो ! कौन … Read more

‘ एक शुरुआत ‘ – विभा गुप्ता

    रश्मि रोज अपने बेटे को प्ले स्कूल छोड़ने जाती, वहाँ दस मिनट रुक कर वापस घर आ जाती और फिर छुट्टी के समय पर बेटे का लाने प्ले स्कूल जाती थी।वह देखती कि प्ले स्कूल के बच्चों की माताएँ कुछ ज़्यादा ही माॅडर्न थीं।कोई आधे पैर वाली जींस के साथ बनियान जैसा टाॅप पहनती तो … Read more

बहू ने कोई दर्द नहीं झेला है! – प्रियंका सक्सेना

बहू ने कोई दर्द नहीं झेला है! – प्रियंका सक्सेना “मम्मी जी, पापा जी को तकलीफ़ हो रही होगी, अब मैं थोड़ा बहुत सम्भाल लूंगी आप पापा जी के पास हो आइए।” आस्था ने अपनी सास कल्याणी देवी से कहा “आस्था बहू! अभी तो  दो महीने ही हुए हैं। तुम सच में सबकुछ सम्भाल पाओगी। … Read more

कभी मेरा दर्द भी देख लेते… – रश्मि प्रकाश

“ जानती भी हो ये कितने का था….. ।” सामने फ़र्श पर पड़े फूलदान को टुकड़ों में बिखरा देख रितेश पत्नी नित्या पर बरस रहा था  “ जी वो साफ करते हाथ से छूट गया….. पता था बहुत क़ीमती था… तभी तो कमली को हाथ लगाने ना देती थी… अब जान बूझकर तोगिराया नहीं ।“ … Read more

बुढ़ापे के दर्द की दवा – पूजा मनोज अग्रवाल

अरे मम्मा क्यूं बर्तन धो रही हो,,,कितनी सर्दी पड़ रही है ,,,फिर से बीमार हो जाओगी तुम,,, । नही बेटा,,,,तुम्हें तो पता है ना में तो पुराने जमाने की हूं और मेरे हिसाब से रसोई में रात को झूठे बर्तन छोड़ना अच्छी बात नहीं है,,, कहकर मालती जी हंसने लगी । ” आपको कितना भी … Read more

मन को भिगो दिया – कंचन श्रीवास्तव

हर कोई शाम अपनी रंगीन करने ही तो आता है, ‘ हलक के नीचे शराब का आखिरी घूंट उतारते हुए रीमा बोली ‘ बता तुझे अभी दूं या और चढ़ा दूं थोड़ा।और मुड़ते हुए तिरछी नज़र से देखा। तो देखते ही हैरान हो गई। आने वाला  शख्स दरवाजे के बाहर चप्पल उतार कर आया था।कुछ … Read more

इस दर्द से मैं भी गुजरी हूं दीदी – सरोज प्रजापति

नौकरी और घर परिवार की दोहरी जिम्मेदारियों के चलते चाहकर भी बीना कई दिनों से अपनी ननद से बात  करने का समय नहीं निकाल पा रही थी। सास रही नहीं इसलिए जब भी समय मिलता वह फोन पर उनका व परिवार का हालचाल पूछ लिया करती थी। जिससे कि उसकी ननद को मां की कमी … Read more

मर के भी ना होंगे जुदा – सुषमा यादव

एक प्यारा सा गांव,,उस गांव की एक खूबसूरत लड़की ऋतु कालेज पढ़ने गई, बहुत कम ही लड़कियां कालेज तक पहुंच पाती।  पर ऋतु के घरवालों को अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलवाना था, अतः बेरोकटोक किसी की भी परवाह किए बगैर ऋतु कालेज पढ़ने जाने लगी,,नये नये लोग,कालेज की नई जिंदगी, उसे बहुत रास आने … Read more

यादें – सुधा शर्मा

 आज फिर वही हिमाचल की खूबसूरत वादी, दूर तक फैली हुई बर्फ के पहाड़ों की मनोरम छटा , चारों ओर हरियाली , ठंड का सुहाना मौसम।, बस फर्क इतना कि तब किसी के स्नेह व भावनाओं से सराबोर प्रफुल्लित मन और आज उसकी स्मृतियों में डूबता उतरता अवसाद ग्रस्त हो चुका मन।               यहीं इन्हीं वादियों … Read more

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