प्रेम और संकोच – डॉ आदर्श प्रकाश

———————- सत्तर का दशक । खबर लगी कि ऋचा एम . ए का पेपर देने लखनऊ नहीं जा रही है । परेशान हो उठा श्लोक । क्या हुआ होगा ? उनके  उस छोटे शहर में बी. ए तक ही कॉलेज था । पैसेंजर ट्रेन से पेपर देने लखनऊ जाना था रोज । तय यही हुआ … Read more

वक्त ने किया क्या हँसी सितम – उमा वर्मा

आज तीस जनवरी है हमारे बाबूजी ( ससुर जी) की पुण्य तिथि ।उनही  की याद में कुछ लिखना चाहती हूँ ।बाबूजी चले गए ।चले तो वे बहुत पहले ही गये थे ।जब मेरे पति और उनके बड़े भाई बहुत छोटे थे।घर के लोगों ने कहा सौतेली माँ के खराब व्यवहार के चलते घर से चले … Read more

वक्त – पूजा मिश्रा

आज अचानक शुक्ला अंकल से मुलाकात हो गई वह ट्रेन में सामने की सीट पर बैठे थे वह मुझे पहचान गए बोले   आप मिसेज मिश्रा हैं जी आप शायद शुक्ला अंकल है मै भी उन्हें पहचान रही थी परंतु संकोच बस नही बोला था आप कहा है आजकल मै अब नवासहर पंजाब में रहता हूं … Read more

“वक्त का आईना” – ऋतु गुप्ता : Moral Stories in Hindi

 Moral Stories in Hindi : शारदा जी के पास उनके प्रभाकर भैया का फोन आया था कि तेरी सरोज भाभी सीढ़ियों से गिर गई है, रीढ की हड्डी में गंभीर चोट आई है, ना जाने अब बिस्तर से उठ भी पाएगी या नहीं ,बच्चे भी पास में नहीं रहते, भले ही नौकर चाकर है पर … Read more

अधूरी खुशियां – प्रियंका मुदगिल

आज फिर से खाना बनाते बनाते कोमल का हाथ गर्म तवे से लग गया।और एकदम से उसके मुंह से चीख निकल पड़ी।उसकी आवाज सुनकर सासू मां (मीना जी) दौड़कर आई। “क्या हुआ बहू?तुम ऐसे क्यों चिल्लाई..” “वो…… मां जी…मेरा हाथ गर्म तवे को छू गया …इसलिए …..” हड़बड़ा कर कोमल ने कहा। सासू मां ने … Read more

अब स्वाभिमान से जीना है – सुनीता तिवारी

आरती का पोर पोर दुख रहा था। आंसू बहाते बहाते आंखे लाल होकर सूज आयीं थीं। उसने एक नजर सोती हुई डेढ़ वर्षीय बेटी परी पर डाली,जो भूख से बिलख बिलख कर सो गई थी और आंसू गालों पर सूख कर निशान छोड़ गए थे। कहने को तो वो एक प्रोफेसर की पत्नी थी,लेकिन खुद … Read more

तुम्हारी कमाई हमारे किस काम की!! – कनार शर्मा

रचिता के ससुराल वाले थोड़ी देर में घर पहुंचते होंगे देखो मुझे मिठाई, नमकीन मेवाराम मिष्ठान भंडार से ही चाहिए… और गुड्डू फल ले आया या नहीं?? और ये लड़की अब तक घर पहुंची क्यों नहीं है जरा से फोन कीजिए… सुनीता जी सुबह से ही हड़बड़ाई थी आखिर लड़की के साथ ससुर उनके घर … Read more

हालात – अनुज सारस्वत 

*** “कितने नौकरी के प्रपोजल आये।तू क्यों नहीं करता ज्वाइन”? माँ ने अनुराग से कहा। अनुराग टीवी देखने में व्यस्त था।अभी इंजीनियरिंग पूरी करी थी उसने।वह बोला “अरे माँ कर लेगें मन की तो मिलने दो जाॅब” माँ बोली  “बेटा मन की नौकरी नही होती ।मन का तो बिजनेस होता है।नौकरी तो नौकरी ही रहती।वैसे … Read more

मॉडर्न बहू – प्रियंका पाठक

तेज प्रताप बाबू अपने बेटों की देखभाल करने और उनको खुश रखने में कोई कोर-कसर नहीं छोङते थे। अपने बच्चों के आगे परिवार के सभी बच्चों को बहुत हिकारत की दृष्टि से देखते। चाहे खुद के परिवार के भांजा-भांजी, भतीजा-भतीजी ही क्यों न हो। पर्व- त्यौहार में सारा परिवार जब इकट्ठा होता तो तरह-तरह की … Read more

उन्मुक्त खिलखिलाहट – लतिका श्रीवास्तव

अरे ये मैं क्या सुन रही हूं बेटा !!तुम मनन को समझाती क्यों नहीं  ये अचानक नौकरी नौकरी की जिद लगा रखी है इसने !!वो भी दूर दराज गांव में!! यहां देख अंशु भी कितने बड़े स्कूल में सोनू के साथ पढ़ता है कितना लंबा चौड़ा घर है आराम है सब सुख सुविधा है…वहां इन … Read more

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