वो गुज़रा ज़माना – गुरविंदर टूटेजा

#वक्त  अप्रकाशित     नीतू आज बहुत खुश थी..अपने गुज़रें वक्त को याद करते हुए..हलवा कहानी बेटियां ग्रुप में पोस्ट की सबने पंसद की व सराहा भी तो उसने वो अपने पारिवारिक ग्रुप में शेयर की…सबकों पढ़कर मजा आ गया फिर तो सब अपना पुराना ज़माना याद किस्सें सुनानें लगें…!!!!  सबसे पहले बुआ जी…नीतू अम्मा को पिताजी … Read more

मैनेजिंग डायरेक्टर !! – पायल माहेश्वरी

” वक्त ने किया क्या हंसीं सितम,  तुम रहे ना तुम, हम रहे ना हम…..वक्त ने किया । “ गुलमोहर उद्योग की आफिसर काॅलोनी के सारे आफिसर व उनकी पत्नियां गुमसुम और उदास होकर घड़ी में वक्त देख रहे थे और रेडियो पर यह गाना बजने लगा जो उनके दुखों की आग में घी का … Read more

रिश्ते – कंचन श्रीवास्तव 

सम्मान एक ऐसा शब्द है जिसपे सबका समान अधिकार है,फिर  पक्षपात क्यों? जबकि इंसान वो भी है और हम भी , अरे भाई उसके कम पढ़ाई की तो उसे उसी लायक काम भी ढूंढ़ना पड़ा और हमने ज्यादा तो हम किसी कंपनी, स्कूल या फैक्ट्री या कह लो सरकारी मुलाजिम है । जैसे की पापा, … Read more

मैं इस बार मायके नहीं आऊंगी.!! – अर्चना खंडेलवाल  

निधि जल्दी से नीचे आओ, तुम्हारा फोन बज रहा है, निधि दौड़कर आती है, मां का फोन था, निधि को और भी काम थे, थोड़ी देर बाद बात करती हूं ये कहकर निधि अपने काम में लग गई,मनन का टिफिन बनाना था, उसके ऑफिस का समय हो रहा था, शिवम को भी स्कूल जाना था, … Read more

आखिर मेरी शादी की इतनी जल्दी क्यों है मां? – चाँदनी झा 

“सुनो न राधिका, कल तैयार रहना, तुमको देखने लड़केवाले आ रहे हैं।” क्यों मां, मैं हमेशा से कह रही हूं, मुझे पढ़ने दो, अभी अपने कैरियर बनाने के बाद ही शादी करूंगी। देखो मेरी लाडली, लड़का बहुत अच्छा है, पैसा वाला है, पैतृक संपत्ति काफी है, और….लड़का का बिजनेस, काफी बड़ा है। एक ही भाई … Read more

शादी के बाद बेटी की मदद कितनी सही?? – संगीता अग्रवाल 

” बेटा ससुराल में सब ठीक है ना दामाद जी का तेरे सास ससुर का सबका व्यवहार कैसा है ?” नवविवाहित बेटी रिया पहली बार मायके आई तो मां साधना जी ने पूछा। ” हां मां सब ठीक है !” बेटी बोली। ” कोई परेशानी हो तो मुझे बता सकती हो  !” साधना जी फिर … Read more

मायके की बेटी अब ससुराल की बहू है!! – मीनू झा 

उसे याद है कभी कोई कहता कि लड़की के गले में मंगलसूत्र और मांग में सिंदूर पड़ने की देर होती है..फिर तो‌ वो अपने ससुराल की ही होकर रह जाती है..तब वो कहती..मैं तो ऐसी नहीं हूं भाई..ऐसा वो‌ लड़कियां करती होगी जिन्हें अपने मायके से उतना प्यार दुलार नही मिला होता..क्यों भला ऐसा करेगी … Read more

साड़ी की फाल  – इन्द्रा सभरवाल धवन      

शिल्पा की नई नई शादी हुई थी और चार दिनों बाद उसका पहला करवाचौथ था। इस अवसर पर वह अपनी मम्मी (सास) को बहुत सुंदर साड़ी भेंट करना चाहती थी। वह अपने पति के साथ प्रगति मैदान के व्यापारिक मेले से सिल्क की साड़ी लेकर आई। साड़ी प्लेन थी उसने सोचा क्यों न वह इस … Read more

सब्र की इंतेहा – कमलेश राणा

बहुत ज्यादा ठंड थी उस दिन , सर्द हवा मानों तन को बेध कर अंदर घुसने के लिए आतुर थी कंबल में से निकलना ही सजा लग रहा था ऐसे में रेवती को एक शादी में जाना था। बहुत करीबी शादी थी जाना जरूरी था, बड़े बेमन से उठकर तैयार होने लगी तभी उसका पोता … Read more

 समझी कुछ – नताशा हर्ष गुरनानी

आज रुनझुन कुछ सोच कर खुश थी और मन ही मन मुस्करा रही थी। क्या बात है बेटा क्या सोच रही हो और मुस्करा भी रही हो ? मुझसे गले लगकर बोली कुछ नहीं मम्मा ऐसे ही, आज स्कूल में कुछ पढ़ाई ही नहीं हुई। क्यों? आज साइंस वाली अनुषा मैम को स्कूल में चक्कर … Read more

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