एक कटोरी सालन – डा उर्मिला सिन्हा
” सो गए।” ” नहीं तो।” “अभी तक जाग रहे हो”। “आज तुमने बड़ी देर लगा दी ।” “हां, आज छोटी के मायके वाले आते थे । चौका-चूल्हा समेटते बारह तो बज ही गये.. खैर….”लंबा नि:श्वास! “तुमने खाना खा लिया।” “तो क्या भूखा बैठा हूं।” “नाराज क्यों होते हो बाबा ,लो जरा हाथ बढ़ाओ।” “अब … Read more