प्रेमभाव – रश्मि सिंह
तू बन जा गली बनारस की, मैं शाम तलक भटकू तुझमें तेरी बातें चटपट चाट सी हैं, तेरी आँखें गंगा घाट सी हैं, मैं घाट किनारे सो जाऊं…. फिर सुबह सुबह जागूं तुझमें। ये गीत सुनकर बनारस की गलियों में भ्रमण करने का मन कर जाता है। यही गीत कुछ दिन पहले मैं यूँही गुनगुना … Read more