फिर कब मिलोगे – डा.मधु आंधीवाल

रुचि खिड़की में खड़ी सोच रही थी आज पांच साल होगये विभू को गये हुये । एक बार भी उसने लौट कर नहीं देखा पर उससे क्या शिकायत गलती तो मेरी ही थी । मैने कहां कोशिश की कि जो गलत फहमियां हम दोनों के बीच पनप गयी उनको दूर करले ।          रुचि और विभू … Read more

इज़्ज़त पाने के लिए इज़्ज़त देना भी पड़ता हैं….. – रश्मि प्रकाश 

“देखा तुमने सुनंदा की बहू यहाँ से शहर क्या गई पूरी शहरी हो गई है …यहाँ थी तो साड़ी पहनती थी और सिर से पल्लू जरा ना सरकता था चार महीने में देखो क्या रंग रूप बदल गए उसके।” सुनंदा जी की पडोसन मालती ने एक पड़ोसन विमला से कहा “जाने दे ना … तुम्हें … Read more

छोटी छोटी खुशियां – मीनाक्षी सिंह

माँ जी जल्दी चलिये ,बाहर बारात निकल रही हैँ ! अकेली चली जा ऊपर ,देख आ छत से ! नहीं माँ जी ,नई बहू हूँ ,सब क्या सोचेंगे ! मेरे तो ढ़ोल पर पैर अपने आप थिरकने लगते हैँ ! कहीं वहीं ना शुरू हो जाऊँ ! बहू प्रांजल हँसते हुए बोली ! तू भी … Read more

‘अंग्रेज़ पड़ोसन ‘ – विभा गुप्ता

हिन्दी भाषा का राग हमलोग चाहे जितना भी आलाप ले लेकिन अंग्रेजी का अं और इंग्लिश का इं बोलने में हम महिलाओं के चेहरे पर जो चमक आती है,उसके क्या कहने।इस भाषा की सबसे बड़ी विशेषता तो यह है कि जिन शब्दों का प्रयोग हम अपने दैनिक जीवन में करते हैं,उसका मतलब हमें मालूम ही … Read more

औलाद की खातिर – मंगला श्रीवास्तव

क्या माँ जब देखो तब बस पत्रिका पंडितजी उपाय तंग आ गया हूँ मैं “समीर गुस्से से बोला और जाने लगा था। नही बेटा बस इस बार और यह कर ले शायद कोई राह निकल आये तेरे भाग्य को जगा दे।  माँ व पिताजी उसकी और कतार निगाहों से देखने लगे थे। नही होगा मुझसे … Read more

आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था – मीनाक्षी सिंह

तो बात उन दिनों की हैँ जब मैं आर्मी क्वार्टरस में रहा करती थी ! पापा ,मैं ,मम्मी और मेरे छोटे दो भाई बहन ! हुआ कुछ यूँ कि सरकारी फरमान आया फौज से कि  सभी के घरों के बिजली तारों को दिवारों  के अंदर किया जायेगा ! इसके लिए सभी के क्वार्टरस की दीवारें … Read more

औलाद –  देखा जो ख्वाब – मोहिनी गुप्ता

“बहू ! अब और इंतज़ार मत करवाओ , कहीं ऐसा न हो कि पोते का मुंह देखे बिना ही इस संसार से चली जाऊं !” एक साल ही हुए थे कशिश और अमन की शादी को मगर कशिश को रोज़ इसी तरह के ताने सुनने को मिलते ।       कोशिश तो कर रहे हैं ना हम … Read more

विश्वास की डोर – नताशा हर्ष गुरनानी

आज रजत बहुत उदास और परेशान है उसे समझ नही आ रहा है वो करे तो क्या करें। कल तक जो परिवार उसका अपना था आज एक पल सब पराए लगने लगे उसे। क्यों सुनी उसने अपने मम्मी पापा की बात कि उसे अनाथालय से गोद लिया था। ओह मैं अनाथ था इन्होंने मुझ पर … Read more

शारदा मैया का अनुपम उपहार – सुषमा यादव

मेरी बेटी की शादी हुए अभी दो साल ही हुए थे कि बच्चे के लिए परेशान होने लगी,उसकी बेकरारी बढ़ती ही जा रही थी। बस यही रटन लगाती, मेरी सभी सहेलियों के बच्चे हो गए हैं, मुझे भी चाहिए। अभी बेटा कितना समय हुआ है, कुछ दिन तो अपने आप को भी समय दो,पर वो … Read more

एक बेटा ऐसा भी – कान्ता नागी

गुरप्रीत की अमृतसर में कपड़ों की एक छोटी सी दुकान थी। परिवार में पत्नी प्रीतो और पुत्र अवतार था।वह बड़ा ही मिलनसार और व्यवहार कुशल था।मंडी मे सभी ग्राहक उसकी दुकान पर ही कपड़े खरीदने आते थे। इस प्रकार उसने अमृतसर में ही अपनी मेहनत के बल पर एक बड़ा शो रूम खरीद लिया।उसका बेटा … Read more

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