निर्मोही – डाॅ उर्मिला सिन्हा

समय अपनी गति से चल रहा था।सबकुछ नियति के हाथों में है।  आकाश में चांद रजत थाल के समान लटका हुआ है…उज्जवल धवल चांदनी चहुंओर फैली हुई है…गंगा के आंखों में सूनापन…नींद कोसों दूर थी ।      भविष्य का पता नहीं….बेमुरव्वत वर्तमान… और अतीत में उलझा बावडा़ मन।   बाल-विधवा …मूंगा.. न नैहर में कोई न ससुराल … Read more

थोड़े से इंसान बने रहिए – लतिका श्रीवास्तव

….ट्रेन की रफ्तार और कानों में लगे ईयर फोन पर म्यूजिक की रफ्तार …. आहा लगता है मानो जिंदगी यही है बस यहीं थम जाए….सच में यात्रा करने में एक सुख तो यही मिल जाता है  ऑफिस जाने तैयार होने मेट्रो पकड़ने का कोई टेंशन नहीं …आराम से आराम ही करते रहो…! आकाश बहुत मगन … Read more

पछतावे के आँसू –  विभा गुप्ता

  ” लेकिन मम्मी, ऐसा कहना क्या ठीक है?”  नव्या ने अपनी मम्मी प्रेमलता से पूछा तो उन्होंने तपाक-से कहा कि क्यों नहीं..? आखिर तू अनिकेत की पत्नी है।उस पर तेरा अधिकार है।     ” ठीक है मम्मी, मैं सुनयना जीजी से ऐसा ही कहूँगी।” कहकर नव्या अपने घर चली आई।             सुनयना नव्या की जेठानी थी।नव्या का … Read more

 “पछतावा” – गोमती सिंह

——-राजवीर एक बहुत ही खुबसूरत नौजवान था ।  ऊंची कद काठी, गोरा रंग इकहरा बदन वो इतना खूबसूरत था कि  किसी से तुलना ही नहीं किया जा सकता , अनुपम सौंदर्य का धनी था वह । हालांकि यह उम्र का पड़ाव ही ऐसा होता है कि यौवनावस्था में साधारण से साधारण युवक युवतियों में खुबसूरती … Read more

द्वारिका जी की सीख – मीनाक्षी सिंह

पार्क में एक लड़का ,लड़की रोमांस करने में व्यस्त ….वहीं एक 70 वर्षीय बुजूर्ग द्वारिका जी पार्क में घूम रहे थे …फिर थककर बैठ गये …तभी उनकी निगाह उस जोड़े पर गयी ….उनसे रहा ना गया …वो उनके पास गये …दोनों ने जब द्वारिका जी की उपस्थिति महसूस की तो झिझक गए …एक दूसरे का … Read more

पछतावे के आंसू –  गीता वाधवानी

मां की तेरहवीं के सारे रीति रिवाज निपट चुके थे। सारे मेहमान भी जा चुके थे। अगले दिन जब पिताजी भी दुकान खोलने चले गए, तब वह मां की अलमारी खोल कर उसके सामने खड़ा था। यह था निखिल। हाथ में बीस हजार रुपए लिए मुस्कुराता हुआ खड़ा था। उसे पता था कि बचपन से … Read more

मेरी परछाईं  – कनक केडिया

अमन बहुत परेशानी से चक्कर काटे जा रहा था। पत्नी अंजलि का पहला प्रसव था और उसमें कई समस्याएं आ गयी थीं। उसका रक्तचाप काफी बढ़ा हुआ था और भी समस्या थी  उसकी डॉ ने ऐसा कहा था। अमन की मम्मी प्रसव के लिए इंदौर से दिल्ली आने वाली थीं पर समय से दो महीने … Read more

काश!!!मैंने अपने दिल की सुनी होती – शुभ्रा बैनर्जी | Real Life Love Story In Hindi

शुभा जब भी बाहर निकलती,हर अपरिचित से संवाद करना आरंभ कर देती थी।इस स्वभाव से कभी नुकसान पहुंचा हो ऐसा भी नहीं,पर परिवार में उसकी इस आदत से सभी उस पर हंसते थे। सब्ज़ी वाला,ऑटो वाला,रेहड़ी वाला,अखबार देने वाला या ब्रेड बेचने वाला ,हर किसी से सुख -दुख की बात कर लेती थी वह।सब्जी वाला … Read more

पछतावा – के कामेश्वरी | family drama story

रमा ने अपने कमरे में जाकर जोर से दरवाज़ा बंद कर लिया और रोने लगी थी । माँ भगवती पीछे पीछे आई और कहा क्या बात है रमा ऐसा क्यों कर रही है? रमा— “ आपको नहीं मालूम है क्या मैं ऐसा क्यों कर रही हूँ?” भगवती— क्या हो गया है ? लडका अच्छा है … Read more

बारात – मंजू तिवारी

जब बच्चा जन्म लेता है चाहे वह बेटी के रूप में हो या बेटे के रूप में उसी दिन से अगर बेटी है तो एक पिता अपनी बेटी के लिए धन जोड़ने लगता है उसे बेटी की बारात की बड़ी फिक्र रहती है कई सालों तक वह उसके अच्छे से विवाह संपन्न होने के लिए … Read more

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