संयुक्त परिवार – रंजू अग्रवाल ‘राजेश्वरी’

सुमि की शादी जब रोहित से हुई तो वह बहुत खुश थी ।रोहित एक अंतराष्ट्रीय कम्पनी में अच्छे पद पर था ।  बड़ा शहर ,अच्छा पैकेज , सभी सुख सुविधाओं से भरा घर और भी बहुत कुछ जिसके उसने सपने देखे थे । शादी के  कुछ दिन बाद रोहित जब नौकरी पर जाने लगा तो … Read more

 ‘ छोटी बहू ‘ – विभा गुप्ता

 ” कमज़ोरी बहुत है,काम की थकान और सही तरह से डाइट न मिलने के कारण ही आपकी छोटी बहू बेहोश हो गई थी।आपलोग तो पढ़े-लिखे समझदार हैं।इतनी समझ तो होनी ही चाहिए कि इन्हें काम के साथ पौष्टिक भोजन और पूरे आराम की भी आवश्यकता है।इतनी कम उम्र में ऐनिमिक होना सुमन के स्वास्थ्य के … Read more

परिवार की अहमियत। – रश्मि सिंह

सपना-सुनिए आपकी समर वेकेशन कब होगी। सुदीप-मई के अंत में। सपना- अबकी बार छुट्टियों में मसूरी घूमने चलें। सुदीप (सपना का पति)- ठीक है पापा से बात करता हूँ कि उनकी छुट्टियाँ कब से है। सपना-क्यों अबकी बार फिर सब साथ में चलेंगे। सुदीप-और क्या मम्मी पापा और प्रदीप (सुदीप का भाई) के बिना क्या … Read more

आम का स्वाद -देवेंद्र कुमार

“अजय, आज घर पर ही रहना। अपने दोस्तों के साथ खेलने मत जाना। दादी अकेली हैं, उनका ध्यान रखना।” कहकर अजय के पापा अविनाश बाहर चले गए। अजय को पता था कि आज मम्मी अस्पताल गई हैं। पापा कह रहे हैं—जल्दी ही अच्छी खबर सुनने को मिलेगी। वह खबर क्या होगी, इसे अजय समझता है। … Read more

“मैं तो जाऊँगी” – पुष्पा पाण्डेय

“अरे बहू !अंधेरे में  क्यों सोयी हो?” बाहर से आती सासु माँ  की आवाज से अंधेरा होने का एहसास हुआ। “हाँ माँ जी, अब अंधेरा दूर हो जायेगा।” सुमन ने एक नयी स्फूर्ति और हल्के मन से कमरे में प्रकाश किया।उसी समय रश्मि  का फोन आया। “सुमन!मैं कल नहीं जा पाऊँगी।” “क्यों?तुम्हें तो स्पीच भी … Read more

परवाज  – नीरजा नामदेव

 शम्पा  के मन में आज बहुत उथल-पुथल मची हुई थी ।वह बहुत ही ज्यादा रोमांचित औऱ उत्साहित थी। वह अपनी छत पर बैठी  आसमान और चांद तारों को निहार रही थी। उसे अपने बचपन की बातें याद आ रही थीं।बचपन में वह अपने ज्यादा समय दादी के साथ ही रहती थी। गर्मियों में आंगन में … Read more

बोलो क्या चुनोगे – हरीश पांडे 

“ऋतु चल पार्टी में चलते हैं। जल्दी तैयार हो जा।” निशा ने ऋतु की पीठ पे थपथपाते हुए कहा। ऋतु जो श्रेया की गोदी में मुँह छुपाये लेटी हुई थी, वो और जोर से रोने लगी। “ऋतु ऐसे कब तक रोते रहेगी। जो होना था वो हो गया। चल बाहर चलते हैं, कोई मूवी शूवी … Read more

परिवार का हिस्सा – रश्मि प्रकाश 

“ बड़ी अम्मा आज रात आप क्या खाएँगी.. बता दीजिए तो वही बना देंगे ।” खाना बनाने वाली सरला ने लीलावती जी से पूछा  “ क्यों आज क्या स्पेशल है जो मुझसे पूछने आई है… हर दिन जो बनता है वो ही बना दे… जो सब खाएँगे वहीं मैं भी खा लूँगी ।” लीलावती जी … Read more

चिड़िया उड़ जायेगी – डा. मधु आंधीवाल

दादी ने अपनी लाडली पोती से कहा — देखो मानसी अब तुम्हारा सम्बन्ध पक्का होगया । रोका हो गया । एक बात गांठ बांध लो बेटा ससुराल की बड़ी बहू बन कर जा रही हो । सम्बन्धों को एक जगह बांध कर रखना तुम्हारी परीक्षा है। मानसी– दादी आपने मुझे जो संस्कार दिये हैं आपको … Read more

बेटीयांँ  होती है बड़ी प्यारी, है ना ! ( भाग -2) – बेला पुनि वाला

ये तो पता नहीं, मुझे जाना था कहा ?        मगर मैं चल पड़ी थी कहीं दूर,       मंजिल का पता नहीं था, मगर कदम थे,         कि रुके ही नहीं।        मन में लिए एक ही सवाल, आखिर मेरी गलती क्या थी ? और  क्या सच में आज तक मैंने अपनी बेटी के लिए कुछ भी नहीं किया … Read more

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