मुझे माफ कर दो नीरा – सीमा प्रियदर्शिनी सहाय
“फिर से एक और बेटी..!,पता नहीं क्या ग्रह लेकर यह मनहूस इस घर में आई है…कुलक्षिणी…!,एक तो खाली हाथ आई है…यहां पड़ी रहकर सिर्फ माल ही उड़ाती रही है.. अब बेटी पर बेटी…उंह…!” मुँह बिचका कर कैकई यानी नीरा की सास ने गुस्से में नीरा से कहा। एक तो नवजात को जन्म देने के बाद … Read more