मुहावरा – विभा गुप्ता

अध्यापिका होने के नाते मुझे सैकड़ों विद्यार्थियों की उत्तर- पुस्तिका जाॅंचने का अवसर प्राप्त हुआ था।कुछ उत्तरों को पढ़कर हॅंसी आती थी तो किसी विद्यार्थी के कम अंक आने पर मन उदास भी हो जाता था।समय के साथ फिर वे धुंधली भी पड़ जाती थीं लेकिन एक उत्तर ने मेरे मन को झंझोर दिया था। … Read more

इस गुनाह की माफ़ी नहीं! –  प्रियंका सक्सेना

आज गार्गी और राकेश बहुत परेशान हैं बार-बार एकदूसरे को देख रहे हैं। वे दोनों पापाजी के रूम में कुर्सियों पर बैठे हैं ,पास में ही पापाजी लेटे  हैं शायद अब जाकर उनकी आँख लग गई है।  तभी उन दोनों ने एकदूसरे को आँखों ही आँखों में कुछ इशारा किया और पापाजी के रूम से … Read more

खून के आँसू रुलाना – के कामेश्वरी

सुरेश चंद्र जी की मृत्यु की खबर पूरे फ़्लैट में आग की तरह फैल गई थी । सब की जुबान पर एक ही बात थी कि कितने अच्छे इन्सान थे । वे रोज़ मंदिर जाते थे । अपने जन्मदिन पर मंदिर के पुजारियों को कपड़े बाँटते थे और तो और ज़रूरतमंदों की सहायता करते थे,तभी … Read more

बस अब और खून के आंसू नहीं रुलायेगा तू बहू को  – मीनाक्षी सिंह

अंदर से जोर जोर से बहू के रोने की आवाज आ रही थी ,खिड़की से झांककर देखा रमेशजी (ससुर ) और मधुजी (सास ) ने तो गिड़गिड़ाने लगे -छोड़ दे बहू को नीरज (बेटा ) ! मर जायेगी वो और कितना मारेगा उसे बेल्ट से ! मधुजी सिस्कियां भरती हुई बोली ! माँ जी ,पापा … Read more

आज कुछ एक्सपेरिमेंटल करती हूं। – मुक्ता सक्सेना

मां, आगे से आप हमसे तो कोई उम्मीद मत रखिएगा। आपने क्या सोच कर हमे पैदा किया था? क्या हमारा कोई अपना भविष्य, पत्नी बच्चे, चाहतें नही है। आपके पास ये अपना घर है। हमे कुछ नही चाहिए। लेकिन हम जीवन भर का बोझ नहीं उठा सकते। क्या इसी दिन के लिए हम लोग पढ़े … Read more

पता नहीं कैसे – गुरविंदर टूटेजा

आज सुधा बहुत खुश थी अपने इकलौते बेटे के लिए  तन्वी जैसी बहू पाकर बहुत समझदार व संस्कारी थी उसे विश्वास था कि वो उसे अपने प्यार से संभाल लेगी…!!!!    अरे चाची क्या सोचने लगी जल्दी से आरती उतारिए व बहू का गृहप्रवेश कराईये…हाँ कहकर उसने आरती उतारी और उसे बड़े प्यार से अपने घर … Read more

डिजिटल रिश्ता – दीपा माथुर

दादी दादी मम्मी को समझाओ ना ?मुझे अभी खेलना है मुंह सुजा कर लक्ष अपनी दादी कीगोद में बैठ गया ।उसे पता है की सब अब हाईकोर्ट की शरण में जाने के बाद मम्मी की ना कहने की हिम्मत नहीं होंगी।दादी क्या कम थी मम्मी को आंख मारती हुई बोलीकीर्ति तुम जाओ अपना काम करो।और … Read more

खुदकुशी या कानूनी जंग – मुकुन्द लाल

भावना बेतहाशा निर्जन, जंगलों, पहाड़ों की ओर दौड़ी चली जा रही थी रोती-कलपती हुई। उसकी आंँखों के आगे बलात्कारी का वीभत्स चेहरा अभी भी घूम रहा था। उसे कुछ भी नहीं सूझ रहा था, बस उसके जेहन में एक ही बात चक्कर काट रही थी कि वह अपने को मिटा देगी। कालिख लगे हुए चेहरे … Read more

दीपावली की रात – के कामेश्वरी

 चारु बेटा हमारी बात मान ले । हमने बहुत दुनिया देखी है। आज ही किरण आंटी एक रिश्ता लाई हैं कहती है कि लड़के वालों ने कहा है कि वे बच्चे के साथ तुम्हें स्वीकार करने के लिए तैयार हैं ।  सोच ऐसा रिश्ता कहाँ मिलेगा ।  चारु ने कहा— माँ मैं नौकरी करती हूँ … Read more

 माफ़ी का क्या करुॅं – विभा गुप्ता

” कंचन सुन, चाय के साथ थोड़ी पकौड़ियाॅं भी तल लेना। मेरी रेशमा काॅलेज से थकी-हारी आई है, बेचारी को कितनी मेहनत करनी पड़ती है, मोटी- मोटी किताबों में सिर खपाना….।”   ” जानती हूँ मामी।रेशमा के लिए पकौड़ियाॅं भी तल दूॅंगी।” कंचन ने अपनी मामी मालती से कहा और प्याज काटने लगी।       कंचन मालती जी … Read more

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