परिवार की बर्बादी का कारण – Motivational Short Story In Hindi 

सीमा के घर से रोने – चिल्लाने की आवाजें बहुत जोर से आ रही थीं जिसके कारण सारा मोहल्ला ही रात के एक बजे वहां एकत्रित हो गया था। अरे…… अरे ये क्या हो गया, और कैसे हुआ, का समवेत स्वर चारों ओर सुनाई दे रहा था। उनकी मात्र छह माह पुरानी पुत्रवधु सुनंदा अर्धजली … Read more

लक्ष्मी – Motivational Short Story In Hindi 

बधाई हो सिंह साहेब आपके घर पर “लक्ष्मी” आई है.. मग़र “यूटेरस” में अधिक चोट लगने की वजह से आपकी श्रीमती अब दुबारा माँ नहीं बन सकती..अस्पताल से डॉक्टर श्रीमती वर्मा ने फोन करके कहा.. सिंह साहेब का खून खौल उठा, उन्हें लगा कि जैसे उस डॉक्टर ने उनके “जख्मों पर नमक छिड़क” दिया हो.. … Read more

जीवन दान – Motivational Short Story In Hindi 

 आक्रोश मन का एक भाव है, कभी कभी आक्रोश की अग्नि प्रज्वलित होकर जीवन को नष्ट कर देती है । सकारात्मक सोच के साथ यह आक्रोश कभी कभी जीवन दान भी प्रदान करता है। इसी सकारात्मक सोच के साथ लिखी एक कहानी…..              आज अंजली सुबह देर से सोकर उठी। रविवार का दिन.. आराम का दिन.. … Read more

मायका.. –  वीणा सिंह

अदिति मेरी बचपन की दोस्त भी पटना आई है एयर पोर्ट आए भाई ने जब ये बात बताई तो मैं खुशी से चहक उठी…            अदिति से मिलने की बात सोचकर हीं मन मयूर नाच उठे.. अपने पापा की पहली पुण्य तिथि पर आई थी…              मैं भी चली गई संजय चाचा जी की पुण्यतिथि के कार्यक्रम … Read more

Short Stories In Hindi

अच्छाई बाकी है – डॉ. पारुल अग्रवाल रमाकांत जी उम्र के साठ साल पार करने के बाद भी काफ़ी ज़िंदादिल और सकारात्मक इंसान थे। कुछ दिनों से वो जब अपनी सैर से लौट रहे होते तो एक बारह-तेरह साल के लड़के को पार्क के कोने में जूतें-चप्पल की मरम्मत वाले बक्से और  कुछ पढ़ने की … Read more

तुम्हारी माँ- डॉ अनुपमा श्रीवास्तवा

मैके से विदा होकर ससुराल आने के बाद सिमी बहू होने की सारी रस्में निभाते- निभाते चूर हो गई थी। वैसे भी ल़डकियों को शादी में सप्ताह दिन पहले से ही अनेकों रस्म-रिवाज भूखे प्यासे निभाने पड़ते हैं ।सो थकान के कारण वह बैठे बैठे ऊँघ रही थी। सिमी को सबने मिलकर उसे अपने कमरे … Read more

आक्रोश का लावा  – रंजू अग्रवाल ‘राजेश्वरी’

अगला नाम है …..रंजीता  गर्ग   माइक पर रंजीता  के नाम की घोषणा होते  ही पूरा हाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा ।मंच पर जाने से पहले रंजीता  ने आंख बंद कर अपने इष्ट देव को प्रणाम किया ,फिर बड़ी दीदी के पैर छुए ।रंजीता  को आज  उसकी पुस्तक ‘आपबीती’ के लिए सम्मानित किया जा … Read more

पैसा बोलता है – शुभ्रा बैनर्जी

बेचारी वो कभी नहीं थीं,मां बेचारी नहीं होतीं,शक्ति होतीं हैं परिवार की।सरला दो बेटों और एक बेटी की मां थी।पति उस शहर में सरकारी नौकरी करते थे,और सरला स्वयं एक शिक्षिका थीं।पति ने अपनी नौकरी रहते ही बेटी और एक बेटे की शादी कर दी थी। रिटायरमेंट के बाद छोटे बेटे की शादी करने का … Read more

वक्त का इंसाफ – वीणा सिंह

सुमी का फोन सुबह सुबह देख कर मुस्कुरा उठी.. बचपन की सहेली..सुमी ने एक सांस में हीं कह डाला जान तुझे याद है मेरी छोटी बहन सेजल.. एचडीएफसी बैंक में पीओ बनकर तुम्हारे शहर में तीन महीने पहले हीं गई है.. उसके पति दूसरे शहर में जॉब करते हैं इसलिए शनिवार और रविवार को रहते … Read more

ज्योति बनी ज्वाला – विभा गुप्ता   

   ” बस सर, अब बहुत हो चुका…., आप अभी के अभी मेरे घर से निकलिये।” चीखते हुए ज्योति ने एक हाथ से अपने कंधे पर रखा अविनाश सर के हाथ को झटक दिया और दूसरे हाथ से उनका काॅलर पकड़कर उन्हें बाहर की तरफ़ धक्का दे दिया।        ज्योति जब नौवीं कक्षा में थी तब वह … Read more

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