मॉं को बच्चों का साथ चाहिए। – अर्चना खण्डेलवाल

मां, मैंने आपके लिए वो सुन्दर सा शॉल भिजवाया था, आप जब नीचे घूमने जाओं तो यही पहनकर जाना, वसु अपनी मां हेमलता जी से कहने लगी, और हां मां मैंने जो आपके लिए स्वेटर भिजवाया है उसे भी पहन लेना, छोटी बेटी कनु भी बोली। इतने में सबसे बड़ा बेटा यश बोला कि मैंने … Read more

ज़हर का घूंट – सुदर्शन सचदेवा

सिया की आँखों में आँसू नहीं थे, बस खामोशी थी। वही सिया, जो कभी हँसी से घर भर देती थी, आज चुपचाप रसोई की खिड़की से बाहर झाँक रही थी। शादी को पाँच साल हुए थे, पर खुशियाँ जैसे किसी पुराने एलबम में कैद हो गई थीं। पति रवि दिन-रात ऑफिस और दोस्तों में व्यस्त, … Read more

अपनत्व की छाँव – सीमा गुप्ता

“मम्मा, आपसे एक बात पूछूं?” मेरी नई नवेली पुत्रवधू आस्था ने मुझसे कहा। उसकी आंखों में जिज्ञासा और स्वर में हल्का सा रोष था। “अरे बेटा! अपनी मां से बात करने के लिए अनुमति की क्या ज़रूरत?” मैंने मुस्कराकर कहा। आस्था ने कहा, “मम्मा, ये बताइए कि आकृति दीदी की ननद के घर दीवाली का … Read more

निरादर – खुशी

लक्ष्मी दो बेटों की मां थी।श्याम और राम उसके पति महेश एक फैक्ट्री में नौकरी करते थे और लक्ष्मी घर से टिफिन सर्विस का काम करती थी। चारों की जिंदगी अच्छी चल रही थी कम था पर वो संतुष्ट थे।बच्चे भी जिद्दी नहीं थे।पर अचानक उनकी खुशी को नजर लग गई फैक्टरी में हादसा होने … Read more

ईश्वर की माया, कहीं धूप कहीं छाया – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

गांव में दो जुड़वां भाई थे—ओम और श्याम। दोनों एक ही खेत, एक ही मां-बाप और एक ही जीवन में पले-बढ़े, लेकिन किस्मत जैसे दोनों के लिए अलग-अलग किताबों में लिखी गई हो। ओम पढ़ाई में तेज़ था, शहर गया, अफसर बन गया। बंगला, गाड़ी, शोहरत—सब कुछ मिला। उधर श्याम गांव में ही रह गया। … Read more

उजाला – संध्या त्रिपाठी

     माँ – माँ उठ ना , देख  तो उजाला हो गया ….. मैं जाऊं पटाखा बिनने ? कहां जाएगी बिटिया पटाखा बिनने …..? जहां तू काम करती है ना माँ ….वहीं …  कल देखी थी मेम साहब का बेटा (भैया) खूब पटाखा फोड़े थे….. जरूर दो- चार इधर-उधर बिना फूटे रह गया होगा …!    अरे … Read more

लक्ष्मी पूजन क्यों – संध्या त्रिपाठी

    बेटा पीहू , तू फटाफट रंगोली वगैरह बनाकर घर को सजा ले मैं पूजा की तैयारी करती हूं …और प्रियांश तू भी दीदी का साथ देना..! बाप रे ये दीपावली के दिन भी ना कितना काम हो जाता है …व्यस्तता के बीच निधि ने दीया ठीक से जमा कर रखते हुए कहा ।           मम्मी , … Read more

ईश्वर की माया कहीं धूप कहीं छाया

आज के जमाने में ज़िंदगी भी सोशल मीडिया की तरह हो गई है—कभी चमकदार तस्वीरें, तो कभी अंदर छिपे संघर्ष। अवनी एक युवती थी, दिल्ली में नौकरी करती थी। बाहर से उसकी ज़िंदगी बहुत सुखी दिखती थी—अच्छी सैलरी, स्टाइलिश कपड़े, और हर वीकेंड दोस्तों संग पार्टी। लोग कहते, “वाह! कितनी खुश है अवनी।” पर सच्चाई … Read more

रिश्तो की परख – लतिका पल्लवी

 शाम के वक़्त राहुल जब खेत से लौटा तो अस्मिता नें पूछा सारा धान कट गया या अभी बाकी है?कार्तिक का महीना था।सभी के खेत मे धान लहलहा रहा था।जिसे काटने का काम पांच दिन पहले शुरू हुआ था। राहुल नें कहा दो तीन दिन अभी और लगेगा।राहुल के पास अपनी जमीन बहुत कम थी।पर … Read more

मुझे भी जीना है केवल सांसें नहीं लेनी हैं – डॉ बीना कुण्डलिया

रंजना ओ रंजना रंजना कहां हो । पति बृजेश ने जैसे ही आवाज लगाई, पति की चिल्लाती हुई आवाज सुनकर रंजना जो रसोईघर में नाश्ते, उनके ऑफिस के लिए लंच की तैयारी कर रही दौड़ती हुई आई बोली क्या हुआ ? आप इतने गुस्से में क्यों चिल्ला रहे हैं ? पति बृजेश तो जैसे नाक … Read more

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