शर्म नहीं गर्व हूं मैं – विनीता सिंह

एक छोटा सा गांव वहां पर शिक्षा का अभाव और उनकी रूढ़िवादी सोच लड़की ज्यादा पढ़ लिख कर क्या करेगी। उसे करना तो चौका चूल्हा है। इसी गांव में रश्मि रहती थी उसका संयुक्त परिवार था उसके पिता जी और दादा जी सोच रूढ़िवादी थी। वह रश्मि के भाई के लिए किताबें, और हर सामान … Read more

तुम दोनों से तो मैं गौरवान्वित हूं बेटा – मंजू ओमर

मामा जी ये देखिए मेरा रिपोर्ट कार्ड,मैं क्लास मैं फर्स्ट पोजीशन पर आई हूं । मामा (प्रमोद)जी कुछ बोलते इससे पहले ही वहां मामी आ गई। अच्छा अच्छा ठीक है यहां रिपोर्ट कार्ड लेकर आ गई दिखाने के लिए मेरे बेटे के कम नंबर आए हैं इस लिए ।अब छोड़ो पढ़ाई लिखाई घर के काम … Read more

कड़वी हवा – रवीन्द्र कान्त त्यागी

पूरा हॉल तम्बाकू के कसैले धुंए और अल्कोहल की मिली जुली दमघोंटू महक से भरा हुआ था. निऑन लाइटों के रंगीन प्रकाश बिंदु इधर से उधर उछल रहे थे. कर्णभेदी संगीत की धुनों पर कई जोड़े लिपटकर ऐसे नाच रहे थे जैसे दुनिया में मुहब्बत की परिभाषा इन्ही से शुरू होकर इन्ही पर समाप्त होती … Read more

 तृप्त – पुष्पा कुमारी “पुष्प”

“सुनिए!.आजकल माँ जी खाना ठीक से नहीं खाती।” रसोई से निपट कर कमरे में आकर पति के बगल में बैठते हुए रजनी ने यह बात अपने पति को बताना जरूरी समझा लेकिन रजनी की बात सुन उसका पति रूपेश तनिक हैरान हुआ.. “मैं कुछ समझा नहीं?” “माँ जी इधर हफ्ते भर से हर रोज अपनी … Read more

कलह – आराधना श्रीवास्तव

रक्षिता की निगाह घड़ी पर गई,  पूरे 10 बज चुके थे ।  वह अपनी मेंज से फाइल समेट जाने के लिए उठी तभी ओबेरॉय टीम लीडर ने आकर कहा…” रक्षिता तुम्हें जो प्रोजेक्ट मिला था, वह अभी तक पूरा नहीं हुआ आज ही प्रोजेक्ट मैनेजर को भेजने की अंतिम तारीख है तुम अभी घर नहीं … Read more

अपनत्व की छांव – खुशी

राधा और मीना दो बहने थी।पिता राजेश और मां रजनी एक छोटा सा खुशहाल परिवार था।राजेश MR था और रजनी स्कूल में अध्यापिका।राधा और मीना दोनो आठवीं में पढ़ती थी।तभी एक सड़क दुर्घटना में उनके माता पिता का देहांत हो गया।उनकी दुनिया उजड़ गई। मामा निरंजन और मामी लक्ष्मी, चाचा राकेश और चाची गरिमा सब … Read more

कलह – टीआर. राहुल कुमार ‘मंदोला’

एक गांव के किनारे पर, पीपल और नीम के साए में एक पुराना घर था। वह घर केवल दीवारों का ढांचा नहीं था, बल्कि एक इतिहास था। मिट्टी की दीवारों में पुरखों की मेहनत की खुशबू थी, बरामदे की खाटों पर हंसी और यादों के निशान थे। सुबह की चाय, शाम की गपशप और त्योहारों … Read more

शर्म नहीं गर्व हूं मैं – रेखा जैन

तुमसे कितनी बार कहा है कि मुझे गरम गरम रोटियां ही पसंद है फिर क्यों ठंडी रोटी ले कर आती हो। एक ही बार में बात समझ नहीं आती है क्या?” आकाश ने रोटी को नीलम के सामने फेंकते हुआ कहा। “मैं गरम ही रोटियां बना कर ला रही हूं लेकिन ठंड इतनी है कि … Read more

जो मायके की ना हुई वह ससुराल वालों की क्या होगी – स्वाती जैंन

भाभी , कितनी चालाकी से फंसाया होगा ना आपने मेरे भैया को तभी तो भैया ने पुरे परिवार के खिलाफ जाकर आपसे शादी की हैं , यह मेंहदी , यह लिपस्टिक , यह चेहरे पर इतनी सारी लिपापोती यही सब करके मेरे भाई को अपने वश में कर लिया होगा ना , सिम्मी अपनी नई … Read more

शर्म नहीं, गर्व हूं, मैं! – लक्ष्मी त्यागी

दामिनी दर्द से कराह  रही थी ,उसकी ससुरालवालों ने, उसे शीघ्र ही अस्पताल पहुँचाया। दामिनी की हालत देखकर उसे तुरंत ही भर्ती कर लिया गया।  उसके पति योगेश परेशान से उस अस्पताल में चक्कर लगा रहे  थे। उसकी सास अस्पताल के मंदिर में हाथ जोड़कर बैठ गयी और भगवान जी से प्रार्थना करने लगी -हे … Read more

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