रिश्ते महंगे तोहफो के मोहताज नहीं होते ! – स्वाती जैंन

अरे दीदी ,  जेठानी जी का गिफ्ट क्या देखना , उनके भाई ने तो सिर्फ एक पाँच सौ रुपए की हल्की साड़ी और मिठाई का डिब्बा पकड़ा दिया हैं , रानी हंसते हुए अपनी ननद आकांक्षा से बोली !! देवरानी के लिए जेठानी के मायके से आया हुआ गिफ्ट उपहास का विषय बन चुका था … Read more

   बाबा तेरे आंगन की….- लतिका श्रीवास्तव

चलिए कन्यादान की रस्म होने वाली है पंडितजी बुला रहे हैं मेघा ने आकर कहा तो रामेश्वर जी के दिल में एक हलचल सी मच गई मानो प्राचीन रस्म रिवाज वर्जनाओं की बेड़ियां तोड़ने को बेताब हो गए हों। जब से निम्मी की शादी तय हुई अजीब सी आकुलता उनके मन को बेचैन करती रहती … Read more

किस्मत अपना रास्ता खुद चुनती है – गरिमा चौधरी

रीमा ने गेट से अंदर दाख़िल होते ही नाक पर रुमाल रख लिया। “हे भगवान, ये कैसी जगह है?” उसने धीरे से माँ के कान में फुसफुसाया, “चारों तरफ़ धूल, खुले नाले, गाय-बैल… और आप कह रही थीं कि यहाँ ‘बहुत बड़ा कारोबार’ है!” माँ ने आँखें तरेरीं—“धीरे बोल, लोग सुन लेंगे। ये तेरे मामा … Read more

घूँघट

शादी के बाद पहली बार नैना अपने पति के साथ मायके आ रही थी  नैना की भाभी( मधु)—सुबह से ही बिना रुके दौड़-भाग में लगी थी। चूल्हे पर खीर उबल रही थी, गैस पर कढ़ी चढ़ी थी और बीच-बीच में वह सजावट भी ठीक करती जा रही थी। उधर, मधु की देवरानी निधि, जो नई-नई … Read more

ससुराल के नियम

सुबह के सात भी नहीं बजे थे कि शर्मा हाउस की घंटी ज़ोर से बजी।अंदर रसोईघर में सब्ज़ी काटती अवनि ने चौंककर घड़ी देखी—“अरे, आज तो सीमा इतनी जल्दी आ गई?” सीमा घर की कामवाली थी, जो आम तौर पर साढ़े सात–आठ के बीच आती थी।दरवाज़ा खोलते ही अवनि ने देखा—सीमा सिर पर पुराना सा … Read more

अधिकार कैसा? – रेखा जैन

“अंकिता तुम्हारा भी अधिकार है। तुम भी अपनी इच्छा बोल सकती हो कि तुमको किसके साथ रहना है? ये तुम्हारा हक है!” “ये कैसा अधिकार जो ये चयन करने में काम आए की मुझे मम्मी के साथ रहना या पापा के? मुझे तो दोनों के साथ रहना है। और अगर उन दोनों को मेरी परवाह … Read more

गुलाबी तौलिया – गीता वाधवानी

पालम गांव के अस्पताल के एक बिस्तर पर पड़ी नैना, जिसने कल ही एक लड़की को जन्म दिया था, उसे उसकी सास माया आग्नेय नेत्रों से घूर रही थी। ” कहा कहां था ना पहला बच्चा लड़का ही होना चाहिए, हमारे खानदान का वारिस, हमारे यहां न जाने कितनी पीढियों से पहली संतान पुत्र के … Read more

अधिकार कैसा – सीमा सिंघी

आज नए घर की गृह प्रवेश की पूजा रखी गई थी ।जिसमें परिवार के लोग और नाते रिश्तेदार भी सम्मिलित हुए थे जिसकी वजह से घर पर चहल पहल बनी हुई थी। पूजन की सामग्री जुटाने के लिए सासू माँ और रसोई का काम मेरी देख रेख में ही हो रहा था कि अचानक मेरी … Read more

दिखावटी रिश्ता – सीमा सिंघी

दफ्तर में बहुत कम लोग रह गए थे,अधिकतर केबिन खाली हो चुके थे। यादवी ने भी यह सब देखकर अपनी फाइलें समेटी और उठ खड़ी हुई।  जैसे ही केबिन से निकलने को हुई अचानक उसके बॉस रवि आ गए । जिन्हें देखकर यादवी ठहर गई। रवि फिर यादवी की तरफ देखते हुए बोल पड़े। क्या … Read more

अधिकार कैसा? – नीलम शर्मा

बेटा मयंक तेरे पापा की सांस शायद तुझे देखने के लिए ही अटकी है। महिमा जी अपने विदेश में बसे बेटे से एक बार आने की विनती करते हुए फोन पर ही सिसकने लगी । पर उनके बेटे मयंक पर उनकी भावुक बातों का कोई असर नहीं हुआ। और बोला मां अब ये रोना-धोना बंद … Read more

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