बूढ़ेे पिता की पेंशन पर कैसा अधिकार – अमिता कुचया

जया सुबह- सुबह ससुर रामचरन जी को किचन में देखकर बोली -बाबू जी मुझे अभी टिफिन बनाना है, आप बाद में गरम पानी करना। वे बोले अच्छा बेटा तू अपने बाथरूम से ही गरम पानी लाकर दे दे। तब जया बोली- बाबू जी अभी बच्चों और आपके बेटे को गरम पानी चाहिए है ,आप को … Read more

हमें बस, आपका आशीर्वाद चाहिए। – लक्ष्मी त्यागी

बरसों पुरानी हवेली के आँगन में शाम की धूप, तिरछी होकर बिखर रही थी। पीली मद्धम रोशनी दीवारों पर पड़ते हुए घर की पुरानी खुशबू को फिर से जगा रही थी—अचार की महक, माँ के हाथों की चाय, और पापा की हँसी, जो अब घर में कम ही गूंजती थी। नीम का वह पुराना पेड़, … Read more

मैंने जिसे हीरा समझा वह तो नालायक निकला !! – स्वाती जैंन

तुम लोग उधार के पैसे से मुझे सेव और पपीता जैसे फल खिला रहे हो , फल खरीदने तक के पैसे नहीं हैं तुम्हारे पास ?? मैं तो कहती हुं अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा तुम्हारे पति मोहित को समझाओ कि उसके छोटे भाई रोहित से पैसे मांग ले , क्या जरूरत थी जलन के … Read more

बस हमें आपका आशीर्वाद चाहिए.. – विधि जैन

देवी बहुत सुलझी हुई सुंदर और सुशील ग्रहणी थी देवी के मां-बाप बचपन में ही गुजर गए थे अपने मां के पास रहती थी मामा ने अच्छा लड़का देखकर जल्दी ही शादी कर दी थी।  जब ससुराल गई तो ससुराल में धीरे-धीरे काम करती थी..  बहु जल्दी से नाश्ता बनाकर लेकर आ जाओ ..देवी ने … Read more

अनोखा बंटवारा – अर्चना खण्डेलवाल

रितु आज मॉं और बाबूजी आ रहे हैं, उनकी पसंद का खाना बनाकर रख लेना, तीन बजे तक वो स्टेशन पहुंचेंगे, मैं तो ऑफिस में रहूंगा, तुम कैब से जाकर उन्हें ले आना। अरे! वो कोई छोटे बच्चे हैं, जो स्वयं नहीं आ सकते हैं, मैं उस वक्त बंटी को लेने जाऊंगी या उनको, रितु … Read more

दिखावटी रिश्ता – उमा वर्मा

आज शम्भु जी की तेरहवीं की रश्म भी  पूरी हो गई ।कल बेटा बहू भी अपने अपने काम पर लौट जायेगा ।सुमन अकेली हो जायेगी ।लेकिन उसने अपने मन को इस परिस्थिति के लिए तैयार कर लिया था ।असल में अब वह अपनी नयी जिंदगी शुरू करेगी । उब गई थी वह इस “दिखावटी रिश्ता … Read more

असली इरादा – moral story

कॉलेज की आख़िरी सालाना समारोह में जब मंच पर पूरे बैच के सामने टॉपर का नाम पुकारा गया, तो ऑडिटोरियम तालियों से गूंज उठा। “काव्या सिंह!” हल्के नीले रंग का सलवार सूट पहने काव्या ने घबराई-सी मुस्कान के साथ स्टेज पर कदम रखा। छोटे से कस्बे की यह लड़की महानगर की नामी प्राइवेट यूनिवर्सिटी से … Read more

हमें बस आपका आशीर्वाद चाहिए – करुणा मलिक 

अनु… माँ नहीं मानेंगी, पूरा घंटा हो गया यहाँ खड़े-खड़े । बस चलो … अब मैं तुम्हारी एक नहीं सुनूँगा ।  बस एक आख़िरी कोशिश…. मैं यहीं रूकती हूँ तुम अंदर जाकर माँ से मिलकर आओ । क्या पता , तुम्हें देखकर उनका ग़ुस्सा शांत हो जाए , प्लीज़ मना मत करना । साहिल जानता … Read more

आख़िर मेरा भी अस्तित्व है – मुकेश पटेल

प्रज्ञा बचपन से ही अलग तरह की लड़की थी।बचपन में जब मोहल्ले की लड़कियाँ गुड़िया-गुड़िया खेलती थीं, वह किसी पुराने रेडियो को खोलकर उसके तारों को जोड़ने में लगी रहती। स्कूल में भी उसका मन हमेशा गणित, कंप्यूटर और किताबों में लगा रहता। पढ़ाई में वह इतना तेज़ थी कि पूरे जिले में उसका नाम … Read more

अधिकार कैसा? – विनीता सिंह

रोशनी जब आठ साल की थी। तब उसकी मां की बीमारी से मृत्यु हो गई। उसके पिता अब रोशनी को ही उसकी मौत का जिम्मेदार समझते और दिन पर दिन उस से नफ़रत करते कहते जब इसका जन्म हुआ तब से उनकी मां बीमार रहने लगी यह बहुत ज्यादा अभागी है और उन्होंने बहुत18साल की … Read more

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