ममत्व की डोर – डॉ. पारुल अग्रवाल
अवनी अपने सपनों की दुनिया में खोई हुई थी, तभी मां ने झंझोड कर हिलाया और बोला उठ जा बेटा नहीं तो मेडिकल कॉलेज जाने में देर हो जायेगी। वैसे तो उसे अपनी नींद से समझौता करना गवारा ना था पर फिर भी कुछ बनने के एहसास ने उसको उठा ही दिया। तैयार होकर वो … Read more