ससुराल के नियम
सुबह के सात भी नहीं बजे थे कि शर्मा हाउस की घंटी ज़ोर से बजी।अंदर रसोईघर में सब्ज़ी काटती अवनि ने चौंककर घड़ी देखी—“अरे, आज तो सीमा इतनी जल्दी आ गई?” सीमा घर की कामवाली थी, जो आम तौर पर साढ़े सात–आठ के बीच आती थी।दरवाज़ा खोलते ही अवनि ने देखा—सीमा सिर पर पुराना सा … Read more
अधिकार कैसा? – रेखा जैन
“अंकिता तुम्हारा भी अधिकार है। तुम भी अपनी इच्छा बोल सकती हो कि तुमको किसके साथ रहना है? ये तुम्हारा हक है!” “ये कैसा अधिकार जो ये चयन करने में काम आए की मुझे मम्मी के साथ रहना या पापा के? मुझे तो दोनों के साथ रहना है। और अगर उन दोनों को मेरी परवाह … Read more
गुलाबी तौलिया – गीता वाधवानी
पालम गांव के अस्पताल के एक बिस्तर पर पड़ी नैना, जिसने कल ही एक लड़की को जन्म दिया था, उसे उसकी सास माया आग्नेय नेत्रों से घूर रही थी। ” कहा कहां था ना पहला बच्चा लड़का ही होना चाहिए, हमारे खानदान का वारिस, हमारे यहां न जाने कितनी पीढियों से पहली संतान पुत्र के … Read more
अधिकार कैसा – सीमा सिंघी
आज नए घर की गृह प्रवेश की पूजा रखी गई थी ।जिसमें परिवार के लोग और नाते रिश्तेदार भी सम्मिलित हुए थे जिसकी वजह से घर पर चहल पहल बनी हुई थी। पूजन की सामग्री जुटाने के लिए सासू माँ और रसोई का काम मेरी देख रेख में ही हो रहा था कि अचानक मेरी … Read more
दिखावटी रिश्ता – सीमा सिंघी
दफ्तर में बहुत कम लोग रह गए थे,अधिकतर केबिन खाली हो चुके थे। यादवी ने भी यह सब देखकर अपनी फाइलें समेटी और उठ खड़ी हुई। जैसे ही केबिन से निकलने को हुई अचानक उसके बॉस रवि आ गए । जिन्हें देखकर यादवी ठहर गई। रवि फिर यादवी की तरफ देखते हुए बोल पड़े। क्या … Read more
अधिकार कैसा? – नीलम शर्मा
बेटा मयंक तेरे पापा की सांस शायद तुझे देखने के लिए ही अटकी है। महिमा जी अपने विदेश में बसे बेटे से एक बार आने की विनती करते हुए फोन पर ही सिसकने लगी । पर उनके बेटे मयंक पर उनकी भावुक बातों का कोई असर नहीं हुआ। और बोला मां अब ये रोना-धोना बंद … Read more
हमें आपका आशीर्वाद चाहिए बस – मंजू ओमर
क्या हुआ जी आप इतने उदास क्यों बैठे हैं ,और ये नाश्ता भी नहीं किया अभी तक ठंडा हो रहा है । क्या सोच रहे हैं ।जगदीश जी ने एक बार पत्नी सुषमा की तरफ देखा और फिर नजरें झुका ली । क्या बात है आप कुछ परेशान हैं , कुछ बोलते क्यों नहीं।वो सुषमा … Read more
अनचाही बहू
“कंडक्टर साहब, यहीं उतार दीजिए… मोती विहार स्टॉप आ गया क्या?” “हाँ हाँ, यहीं है, उतर जाओ अम्मा जी,” बस रुकते ही कंडक्टर ने आवाज़ लगाई। शोभा ने एक हाथ में स्टील का डब्बा, दूसरे में बैग सँभाला और धीरे-धीरे बस से नीचे उतरीं। पीछे से महेन्द्र भी सैकड़ों कोशिशों के बाद बस की सीढ़ियाँ … Read more
ओवरवेट – हेमलता गुप्ता
“बहुत मुबारक हो वर्मा जी… ऐसा सुंदर , हैंडसम लड़का… और ऊपर से यूएस रिटर्न इंजीनियर!”रहीश खान ने हँसते हुए कहा तो मोहनलाल की मूँछें गर्व से तन गईं। “कहाँ भैया, हमारी औक़ात ही क्या है इनके सामने, खुद चलकर रिश्ता लेकर आए हैं तो ऊपर वाले की मेहर है,” मोहनलाल ने विनम्रता से जवाब … Read more