“सास का समर्थन” – तृप्ति देव   : Moral Stories in Hindi

एक शहर मे ,शर्मा परिवार एक संयुक्त परिवार था, जहां तीन पीढ़ियाँ एक ही छत के नीचे हंसी-खुशी रहती थीं। और परिवार का दिल, आंगन  में था, जहां हर सुबह की चाय से लेकर रात के खाने तक सब कुछ साझा होता था। पूरा परिवार बैठ के  सुख दुख साझा करते थे। उसी परिवार में  … Read more

प्रेम की पीड़ा – गणेश पुरोहित   : Moral Stories in Hindi

नीमा की असामयिक मौत उसके वृद्ध माता-पिता के लिए एक वज्रपात से कम नहीं थी। अनूप जो इस परिवार के घर में किराये पर रहता था, वह भी इससे बूरी तरह आहत हुआ था। सुबह नींद खुलते ही उसे यह दुखद समाचार मिला और वह दिन भर थकावट भरी भाग-दौड़ में व्यस्त रहा था। रात … Read more

मौन – साक्षी तिवारी   : Moral Stories in Hindi

महेश बाबू आज अपने घर के बरामदे में शर्मिंदा होकर बैठे हुए थे ।उन्हें तो उम्मीद ही नहीं थी कि उनके कर्म इस तरह लौट कर आयेंगे ।तारा  भी अपने कमरे में  दुखी हो कर बैठी अपने अतीत को याद कर रही थीं। तारा गांव के एक गरीब किसान की बेटी थी ।बीस साल की … Read more

 अपना धन-पराया धन – बालेश्वर गुप्ता  : Moral Stories in Hindi

 सुनो विवेक,मेरा रिज़र्वेशन कैंसल करा दो,मैं मम्मी के यहां नही जा रही हूँ। क्यों क्या हुआ शालिनी?तुमने ही तो कहा था,बहुत दिन हो गये, भैया भाभी,मम्मी के पास गये।तुम क्या देख नही रहे हो,माँ को परसो से बुखार है,भला ऐसे में मैं कैसे जा सकती हूँ? अरे माँ के पास तो शिखा आ जायेगी।उनकी बेटी … Read more

कलंक नहीं ये प्यार है – सीमा प्रियदर्शिनी सहाय  : Moral Stories in Hindi

एनडीआरएफ की टीम मुस्तैदी से ड्यूटी पर तैनात थी। अचानक ही एक ग्लेशियर का टुकड़ा फिसल कर नदी में आ गिरा था और सुस्त सी बहने वाली उस पहाड़ी नदी में बाढ़ आ गई थी। इतना पानी भर गया था कि आनन फानन में आर्मी और एनडीआरएफ की टीम को वहां तैनात करना पड़ गया … Read more

कलंक की आँच – अर्चना कोहली ‘अर्चि’ : Moral Stories in Hindi

“इस बीना की यह आदत बहुत ही खराब है। जब मन किया घर बैठ जाती है। कभी फोन कर देती है तो कभी फोन स्विच ऑफ करके चुपचाप बैठ जाती है एकाध महीने को छोड़ दें तो हर महीने सात-आठ छुट्टी तो पक्का होती ही हैं। काम तो बहुत अच्छा करती है, इसलिए इतना सहन … Read more

कलंक – वीणा सिंह : Moral Stories in Hindi

मायके की दहलीज पर कदम रखते हीं बचपन अठखेलियां  करने लगता है.. आस पड़ोस की बुआ चाची स्कूल कॉलेज की सखियां शिक्षक शिक्षिकाओं  के चेहरे आंखों के सामने घूमने लगते हैं..         सब की खैरियत पूछने के क्रम में मैने लाली चाची का जिक्र किया.. मां उदास होकर बोली लाली नही रही… ओह..                        मुहल्ले के बेहद … Read more

एक दिन ये समय भी गुजर जाता है – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

रिया एक सीधी -सादी सी गृहणी थी, पति और दोनों बच्चों में उसकी दुनिया थी। ख्वाब भी छोटे थे तो कोई कसक भी नहीं थी, जो था उतने में ही खुश रहती थी .। कहते है ना सुख एक जगह ठहरता नहीं, अच्छी भली रिया की गृहस्थी में अचानक एक तूफ़ाँ आ गया, जब पता … Read more

ये मेरी बहन है, नौकरानी नहीं. – सविता गोयल : Moral Stories in Hindi

” बेटा, बाथरूम में बहुत से कपड़े पड़े हैं। आज धुल जाते तो कल तक सूख जाएंगे। ,, रमा जी ने मनुहार करते हुए अपनी बेटी प्राची से कहा। ” मां मैं तो बहुत थक गई हूं। आज मुझसे कपड़ों की मशीन नहीं लगने वाली…. ,कल देखूंगी। ,, कहते हुए प्राची कमरे की ओर चल … Read more

एहसास – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

अस्पताल के एक अच्छे से कमरे में सामने शून्य की ओर निहारती श्रुति आसपास कौन है इन सब से बेख़बर बस बिना पलके झपकाए उस शख़्स को देखे जा रही थी पर चेहरे पर कोई भी भाव नहीं था कोई देख ले तो यही कहेगा वो मर चुकी हैं पर आँखें खुली हुई है। सामने … Read more

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