आत्मसम्मान – वीणा सिंह : Moral Stories in Hindi

जलते दीए से निकलती ज्योति से आसपास का अंधेरा तो दूर हो जाता है! पर ये भी सच है चिराग तले अंधेरा! माता पिता ने नाम तो रौशनी रखा था! पर आजीवन दूसरे की जिंदगी रौशन करते खुद अपने नाम का अर्थ भूल गई! पर अपने #आत्मसम्मान #से कभी समझौता नही किया.. रौशनी के माता … Read more

भगवान का कोई बंटवारा नहीं कर सकता – बीना शर्मा : Moral Stories in Hindi

“जो रिश्ता विपत्ति बांटने के लिए बनाया जाता है वह रिश्ता खुद संपत्ति बांटने के चक्कर में बट जाता है अपने गांव में हमने कई घरों में देखा है माता-पिता को अपने ही बच्चों के बीच में बटते हुए  इसलिए हमने भी सोच लिया है बेटा जैसा तुम कहोगे हम वैसा ही करेंगे अब बताओ … Read more

दुनिया का दस्तूर – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

   ” माँ- माँ..देखो ना..छोटे को बहुत चोट लगी है।” कहता हुआ बारह वर्ष का आशुतोष अपने छोटे भाई अंकित का हाथ पकड़कर दौड़े अपनी माँ सुनंदा के पास आया।वहीं पर बैठी सुनंदा की माँ आशुतोष के कान पकड़ने लगी तभी सुनंदा ने आकर अपनी माँ का हाथ रोक लिया,” नहीं माँ..आशुतोष को कुछ न बोलो।ज़रूर … Read more

कचरे का डिब्बा – लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

मां देख मैं क्या लाया हूं.. वीनू ने चहकते हुए कहा तो मुनिया बर्तन रगड़ते पलट कर देखने लगी क्या है री इत्ता चहक रहा है देखा तो वीनू के हाथ में एक अधखाया सेब फल था जो सड़ गया था।कहां से लाया किसका जूठा है .. मुनिया हाथ का काम छोड़ कर खड़ी हो … Read more

“मेरे आत्मसम्मान को यूं मत झकझोरो सासू मां ” – सिन्नी पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

नीतू बाथरूम से नहा कर निकली तो लाइट बन्द करना भूल गई, वह पूजा कर रही थी तभी उसकी सास कमलाजी ने बड़बड़ाना शुरू किया कि “बत्ती ऐसे जलाकर छोड़ देती है जैसे बिजली मुफ्त में आती है, बिल भरना पड़े तो पता चले”| नीतू मायूस होकर सुनती रही, पूजा करते हुए उसकी ऑंखें भर … Read more

मंगला मुखी (भाग-18) – ( एवं अन्तिम ) बीना शुक्ला अवस्थी : Moral stories in hindi

तीन महीने बाद रात को डॉक्टर सौरभ के शयनकक्ष में – ” सौरभ, वह बच्ची कैसी है जिसकी तुमने पापा के कहने से सहायता की थी।” यह डॉक्टर सौरभ कुलकर्णी की पत्नी नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर स्वाति थीं। ” अब वह काफी ठीक है। सच पूॅछों तो इस कार्य में इतने लोगों ने सहायता की … Read more

मंगला मुखी (भाग-17) – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral stories in hindi

बाबू ने एक पल रुककर दोनों को देखा। शायद उन्हें विश्वास था कि इतनी बड़ी बात सुनकर कदम्ब अपना निर्णय बदल देगा लेकिन वे दोनों अब भी चुप थे, तब उन्होंने तुरुप की आखिरी चाल चली – ” एक बात और कान खोलकर सुन लो। हमारे पास जो कुछ है, उसमें से तुम्हें कुछ नहीं … Read more

मंगला मुखी (भाग-16) – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral stories in hindi

कदम्ब अम्मा बाबू का अपमान नहीं करना चाहता था। इसलिये इतनी देर से सहन करता जा रहा था। वह चाहता था कि यदि सब कुछ शान्ति से निबट जाये तो अधिक अच्छा है लेकिन अब उसे बोलना ही था – ” अम्मा आप बार बार मेरे बच्चे को मनहूस कहकर उसे फेंकने को कह रही … Read more

मंगला मुखी (भाग-15) – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral stories in hindi

नाश्ता समाप्त हो गया तो वीथिका जूठे बर्तन उठाकर रसोई में जाकर रख आई और दुबारा आकर कदम्ब के बगल में बैठ गई। भीतर ही भीतर उसे बहुत डर लग रहा था क्योंकि वह अम्मा का स्वभाव जानती थी। अम्मा अपने आगे किसी की न तो सुनती हैं और चलने देती हैं। हमेशा अपने कलह … Read more

मंगला मुखी (भाग-14) – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral stories in hindi

पहले तो अम्मा पापा का गुस्सा देखकर थोड़ा परेशान हुईं लेकिन इतने वर्षों में उन्हें बाबू को अपने पक्ष में सहमत करना, उन्हें सम्हालना बहुत अच्छी तरह आ गया था। उन्होंने बाबू को समझाया – ” इस तरह बेमतलब चिल्लाने से कोई फायदा नहीं है। चलो, शहर चलकर देखते हैं कि असली बात क्या है?” … Read more

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