सुलक्षणी बहू – शिव कुमारी शुक्ला : Moral Stories in Hindi
माधवी जी का बेटा पढ लिख नौकरी में लग गया था। अब उन्हें उसकी शादी की चिन्ता हुई। सोचने लगी कि पहले का जमाना तो रहा नहीं जो लड़कों के रिश्ते घर बैठे आ जाते थे। छोटी उम्र की लड़कियां होती थीं जो ससुराल में सामंजस्य बैठा ही लेतीं थीं। किन्तु अब परिस्थितियां भिन्न हैं। … Read more