असली मूल्य रिश्तों का होता है – मीनाक्षी सिंह : Moral Stories in Hindi

दिव्या जी के पति के बड़े ताऊ जी का निधन हो गया था और उनकी तेरहवीं में शामिल होने के लिए सभी परिवारजनों को बुलाया गया था। दिव्या जी के मना करने के बावजूद उनके पति ने उन्हें समझाया कि यह केवल एक दिन का ही तो मामला है, शाम तक सबसे मिलकर, दावत खाकर … Read more

मायका एक बेटी का – सुभद्रा प्रसाद : Moral Stories in Hindi

कविता और उसका परिवार एक बड़े और सुविधासंपन्न शहर में रहता था। उसके पति एक अच्छी नौकरी करते थे, और घर में सभी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध थीं। हर तरह के सुख-साधन होने के बावजूद कविता का मन अपने मायके के छोटे शहर में बसता था, जहाँ वह अपना बचपन बिताई थी। एक दिन जब कविता … Read more

निर्णय – गीता वाधवानी : Moral Stories in Hindi

कीर्ति का जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। वह बचपन से ही होशियार, सुसंस्कृत और आत्मविश्वास से भरपूर थी। कीर्ति ने पढ़ाई में हमेशा अच्छे अंक प्राप्त किए और अपने माता-पिता का नाम रोशन किया। कीर्ति की शादी एक अच्छे परिवार में हुई थी। लेकिन जल्द ही उसे एहसास हुआ कि उसके पति में … Read more

मान सम्मान – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

अंजना जी की  जेठानी कुछ समय के लिए उनके घर आईं थीं। वे उम्र में काफी बड़ी थीं और अपने जीवन के कठिन दौर से गुजर रही थीं। जीवन में समय का पहिया ऐसे घूमा कि अब वे खुद किसी के सहारे की तलाश में थीं। वे पहले से ही काफी धनवान थीं और अपने … Read more

नेकराम की जलेबी – नेकराम : Moral Stories in Hindi

स्कूल से छुट्टी करके घर लौटा ही था की अम्मा दरवाजे का ताला लगाकर चाबी पड़ोसन को देते हुए कह रही थी जब नेकराम आए तो उसे चाबी दे देना मगर मुझे देखते ही कहा,, नेकराम तू आ गया,, बस्ता अपनी कमला आंटी को दे दे और मेरे साथ चल जल्दी कमला आंटी ने झट … Read more

एक घुटन भरे रिश्ते से आखिर आज़ादी मिल ही गयी। – नितु कुमारी : Moral Stories in Hindi

आज फिर अनामिका की सुबह दर्द के साथ शुरू हुई। उसका बदन दर्द से टूट रहा था। उसमे उठ कर चलने की भी हिम्मत नही बची थी। लेकिन करण को ऑफिस जाना था और सारी चीजें समय पर नहीं मिलेंगी तो वो फिर गुस्सा करेगा। करण का गुस्सा मतलब अनामिका की पिटाई। शादी के एक … Read more

आखिरी मैसेज – पूर्णिमा सोनी : Moral Stories in Hindi

आलमारी में अपने कपड़े जमा कर  पूनम पलटी ही थी कि फोन पर निगाह पड़ी, उठा कर देखा तो बहुत से मिस काल और मैसेज पड़े थे। क्या करें? जब से इस शहर में ट्रांसफर हो कर आई है, काम से फुर्सत ही नहीं मिल रही है। पतिदेव  और बिटिया आते ही अपनी व्यस्तता में … Read more

अफसोस – नीलम शर्मा : Moral Stories in Hindi

ट्रेन धड़-धडाते हुए उज्जैन की तरफ दौड़ी चली जा रही थी और काव्या अपने अतीत के गलियारे में खोई थी। आज भी उसे उस दिन का अफसोस था। जब उसने अपने माता-पिता की बातों को अनसुना कर घर से भाग जाने का निर्णय लिया। और अपना व अपने मम्मी-पापा का मान सम्मान सब तार-तार कर … Read more

“वो फिर नहीं आई” – रवीन्द्र कान्त त्यागी : Moral Stories in Hindi

वो एक बिजली के खंबे से पीठ लगाए खड़ी थी. फुटपाथ पर चलते हुए एक निगाह उसके ऊपर डाली तो …….. गोरा रंग, लंबा पतला शरीर और उम्र …… उम्र कुछ रही होगी पच्चीस छब्बीस साल. ठीक ही है. चलेगा. मैंने उसके सामने से गुजरते हुए ऊपर से नीचे तक उसके पूरे जुगराफिए का पुनरमूल्यांकन … Read more

समय का फेर – डाॅ उर्मिला सिन्हा : Moral Stories in Hindi

रमा का परिवार उसे हमेशा ही मनहूस कहता था। उसके ताने सुनने का सिलसिला बचपन से ही शुरू हो गया था, जब उसकी ताई दांत पीसकर कहती, “यह कुलच्छिनी जन्म लेते ही मां को खा गई, फिर बाप को भी निगल गई। इसके साये से भी दूर रहना चाहिए।” इस तरह की बातें सुन-सुनकर रमा … Read more

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