पढ़ी-लिखी बहू – नेकराम : Moral Stories in Hindi

सरला अग्रवाल के तीन बेटे थे दो बेटों की शादी हो चुकी थी उनकी पत्नियां कम पढ़ी लिखी थी किंतु तीसरे बेटे की बहू सविता पढ़ी लिखी थी बस यही चिंता घर की दोनों जेठानियों को और सास को सता रही थी सरला ने अपनी दोनों बड़ी बहुओ को अपने पास बुलाया और कहा मैंने … Read more

परिवार की इज्जत – बिंदेश्वरी त्यागी : Moral Stories in Hindi

विवाह मंडप में बैठे पंडित जी बार-बार कह रहे थे की फेरों का समय हो गया है कन्या को लाइए l कन्या को लाने में देरी हो रही थी l सक्षम दूल्हा बना मंडप में बैठा दुल्हन का इंतजार कर रहा था “ थोड़ी देर बाद साक्षी की मां सक्षम की मां गीता देवी कन्या … Read more

काश! तू बड़ी ना होती – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

      ” पापाजी…मिनी…।”   ” क्या हुआ मिनी को संदीप..बताओ..क्या हुआ..।” फ़ोन पर अपने दामाद की घबराई आवाज़ सुनकर मनोहर चीख पड़े।   ” वो मिनी…।” कहते हुए संदीप ने जो कुछ कहा, उसे सुनकर उन्हें कुछ होश नहीं रहा।उन्होंने पत्नी को आवाज़ लगाई,” मनोरमा..ज़ल्दी से एक थैले में चार कपड़े रखो..हमें तुरंत शहर जाना है।”     ” शहर!..मिनी … Read more

भगवान की लाठी में आवाज नहीं होती – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

80 साल के लक्ष्मी नारायण जी और 75 साल की उमा जी जगह जगह किराए का मकान ढूंढते फिर रहे हैं । तभी रास्ते में अचानक से उनके पुराने मित्र गोपाल दास जी मिल जाते हैं ।अरे लक्ष्मी कहां घूम रहा है , अरे कुछ नहीं बस एक किराए का मकान ढूंढ रहा हूं । … Read more

मन का रिश्ता – सीमा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

“परी, तुम्हें पता है ना! मुझे सिर्फ तुम्हारे हाथ का गर्म खाना अच्छा लगता है। फिर भी तुम इतनी देर से आई। जो लंच तुम सुबह पैक करके देती हो, वह तो मैं ऑफिस में ठंडा ही खा लेता हूं। मैंने कभी शिकायत की क्या? पर यार, मुझे ब्रेकफास्ट और डिनर तो गर्म ही चाहिएं। … Read more

मन का रिश्ता – उमा वर्मा : Moral Stories in Hindi

आज सुबह सुबह खबर मिली, आप नहीं रही। “यह कैसे हो सकता है?” मेरे मन को बहुत धक्का लगा ।आप तो मेरी बड़ी दीदी थी।मेरी सबकुछ ।पता नहीं कब से आपसे मन का रिश्ता जुड़ गया था ।आपसे सच कहा जाए तो कोई रिश्ता नहीं था । फिर भी एक मन का रिश्ता होता है … Read more

Top Ten Shorts Story in Hindi – हिन्दी लघुकथा

गलतफहमी – प्राची अग्रवाल  श्रुति को शुरू से ही लगता कि उसके माता-पिता उसे कम और भाई को ज्यादा प्यार करते हैं। बचपन से ही उसके मन में गांठ बैठ गई थी। हर बात पर विरोध प्रकट करती। श्रुति होशियार थी हर बात में। उसका भाई शुरू से ही थोड़ा बीमार सा रहता इसलिए उसकी … Read more

Top Ten Shorts Story in Hindi – हिन्दी लघुकथा

” विरोध” – पूजा शर्मा अब मैं तुम्हारी मा के साथ एक पल भी नहीं रह सकती सुमित, तुम्हारी मम्मी की हर बात में टोका टाकी मुझे बिल्कुल पसंद नहीं है, विदुषी अपने पति से चिल्ला कर बोली, आखिर तुम हर वक्त मां की बातों का विरोध क्यों करती रहती हो अगर ऑफिस से देर … Read more

झूठी हैं दीवारें – मंजु सिंह : Moral Stories in Hindi

आज चैन की सांस ली थी अनीता ने । कब से इसी बात को लेकर चिंतित थी कि रचना का एडमिशन किसी अच्छे कॉलेज में होगा या नहीं ।आजकल दाखिले के लिए इतने अंक लाना सब के बस की बात कहाँ रह गयी है !  किस्मत अच्छी थी रचना की कि उसका दाखिला दिल्ली के … Read more

अनारकली – अंजना वर्मा : Moral Stories in Hindi

“ऐ! चुप रह। जब देखो तब मुस्कुराती रहती है, ठी-ठी-ठी-ठी हँसती रहती है। न कोई सोच, न कोई चिंता। थोड़ी भी शरम है?” दीपा की भाभी ने कहा। “किस बात की शरम भाभी? क्या किया है मैंने? कौन-सा ग़लत काम किया है जो शरमाऊँ?” दीपा बोली। “क्या किया है? मुझसे पूछती है? अपने से पूछ।” … Read more

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