पापा मैं छोटी से बड़ी हो गई क्यूँ – सुभद्रा प्रसाद : Moral Stories in Hindi

रचना अपनी शादी के सात महीने के बाद मायके आई थी | उसके पति रंजन उसे पहुंचाने आये थे | एकदिन रहकर वे दूसरे दिन लौट गये | कहकर गये कि सात दिन रहकर पापा के साथ वापस आ जाना | मैं लेने नहीं आऊंगा | रचना को यह अच्छा नहीं लगा कि रंजन सिर्फ … Read more

साक्षात दुर्गा – डॉ.पारुल अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

रिया सोलह साल की बातूनी,अल्हड़ और स्वभाव से हिम्मती लड़की थी।उसकी चचेरी बहन के पति का ट्रांसफर उनके ही शहर में हो गया था।चचेरीबहन और उसके पति ने उनके घर से थोड़ी दूरी पर ही घर लिया था।अब तो रिया को जब भी समय मिलता वो अपनी दीदी के यहां चली जाती। धीरे-धीरे रिया ने … Read more

वचन – मीनाक्षी सिंह : Moral Stories in Hindi

चलिये गोविन्द जी गाड़ी तैयार हैँ…. हां चल तो रहे हैँ संजय जी लड़के वालों के घर … पर मन बहुत दुविधा में हैँ कि लड़की कहीं गलत जगह ना फंस जायें … जैसा तुमने बताया कि लड़के वाले  किराये के घर में रहते हैँ…. दो बेटी दो बेटे हैँ…. कोई बाप दादाओं की कमाई … Read more

मन का रिश्ता – डॉ आभा माहेश्वरी : Moral Stories in Hindi

“ऊँची ऊँची पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा– चहुँओर हरियाली का श्रृंगार किये– कौसानी की एक अलग ही मनोरम छटा– जो देखता वो मनमुग्ध होजाता– अपने को ही विस्मृत कराने की कला थी –अद्भुत पर्वतीय प्रदेश कौसानी में।वहीं रहता था कामिनी का परिवार– पहाड़ों की शैली में रमा हुआ– वो ही पारम्परिक परिधान– साज सज्जा सब वहीं … Read more

कुछ तो लोग कहेंगे… – प्रियंका सक्सेना : Moral Stories in Hindi

रविवार की छुट्टी  के बाद सोमवार के दिन यूँ तो मन अलसाया रहता है लेकिन काम तो आखिर करने ही होते हैं।  गौतम के ऑफिस जाने के बाद माला जी और दीपा ने नाश्ता किया। तभी ऑटोमेटिक मशीन ने कपड़े धुलने का सिग्नल दिया। बाल्टी में कपड़े निकालकर दीपा छत पर कपड़े फैलाने चली गई … Read more

मन का रिश्ता – खुशी : Moral Stories in Hindi

दोस्तो कई बार हमारे घर के खून के रिश्ते हमारे साथ नहीं जुड़ पाते अपितु पराए हमारे अपने हो जाते है।जानकी अमेरिका के एयरपोर्ट पर खड़ी थी।आज पहली बार वो अमेरिका आई थीं।बहु रजनी की पहली डिलिवरी के लिए ।जानकी एक 50 वर्ष की महिला थी जिन्होंने अपने घर,पति और बच्चों में ही अपनी जिंदगी … Read more

जहां चाह वहीं राह – डॉ बीना कुण्डलिया : Moral Stories in Hindi

 राधा ओ राधा …..अरी कहां मर गई, काम की न काज की… । सौतेली मां की आवाज सुनकर राधा हड़बड़ाईं किताब एक तरफ रखकर सीधे रसोईघर में घुस गई माँ के गुजरने के बाद सौतेली माँ ने इसी शर्त में पढ़ने की इजाजत दी थी घर के सारे काम यथा समय उसके द्वारा निपटा दिये … Read more

झूठी मां – संध्या त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

   तेरे शादी करके चले जाने से मैं अकेली रह जाऊंगी ….इसलिए तू अभी शादी नहीं करेगी….. अरे न जाने किस मिट्टी की बनी है तू मेरी पोती ( श्रुति )…… शायद उसी मिट्टी की ….जिससे तेरी मां बनी थी….!       मेरे कुछ अमानवीय व्यवहार जो मैंने कभी तेरी मां के साथ किया था…. तुझे भी तो … Read more

पापा मैं छोटी से बड़ी हो गई क्यों ??? – शनाया अहम : Moral Stories in Hindi

पापा मेरे प्यारे पापा , आप यहां नहीं हो लेकिन मुझे मालूम है कि आप मेरी हर बात सुन रहे हैं , मेरे दिल में उठते सवालों को आप समझ रहे हैं।  पापा आख़िर क्यों मैं बड़ी हो गई , मुझे फिर से आप की वही छोटी सी गुड़िया बनना है। जिसे आप ऊँगली पकड़ … Read more

दिल का रिश्ता जरा पुराना है…. – पूर्णिमा सोनी : Moral Stories in Hindi

रसोई यानि कि वह जगह जहां एक स्त्री, अपने परिवार के लिए भोजन बनाती है,और नई नई ब्याही तो अपनी पाक कला आजमा कर ( या फिर उसका भरपूर प्रदर्शन कर) अपने पति के मन को प्रसन्न करने का उपाय ही ढूंढती रहती थी। हां भाई, हमारे समय की बात है ना, फिर कहते हैं … Read more

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