“बड़ा दिल” – डॉ अनुपमा श्रीवास्तवा  : Moral Stories in Hindi

अपना और अपनी पत्नी का सामान दोनों हाथों में टाँगे मैं लंबी -लंबी डग भरते हुए चल रहा था। बीच-बीच में पलटकर देख भी ले रहा था कि विभा मेरे पीछे है या नहीं! कभी-कभी वह बहुत पीछे रह जाती थी तो मैं जोर से आवाज लगा रहा था….विभा…..विभा आ रही हो ना!  वह तुनक … Read more

इत्ती सी परवाह (भाग -2) – लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

बेटा पापा को फोन किया था तुमने हाल चाल लेते रहना मुझसे तो बात ही नहीं करते हैं जाने इस उमर में कौन सी क्लास ज्वाइन किए है ….शिमली दोपहर से बहुत उद्विग्न थी। मां पापा एकदम मजे में है रिनी के घर में । जीजाजी बहुत ख्याल कर रहे हैं उनका आप क्यों चिंता … Read more

इत्ती सी परवाह – लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

पापा  अब तो आप रिटायर हो गए हैं अब फुर्सत से हमारे घर चलिए और रहिए थोड़ा चेंज हो जाएगा आपको अच्छा लगेगा मेहुल छोटे दामाद इस बार पीछे ही लग गए थे। मुकुंदजी की रिटायरमेंट पार्टी में पूरा परिवार इकठ्ठा हुआ था।सबके आ जाने से पूरा घर उल्लसित हो उठा था।अब धीरे धीरे सबके … Read more

नया स्वेटर – कविता झा ‘अविका’ : Moral Stories in Hindi

अंबिका हैरत भरी नज़र से दरवाजा खोलते ही अपने पति शशांक को देखती है… जो दिसंबर की इस कड़कड़ाती ठंड में बिना स्वेटर  के ऑफिस से घर आ रहे थे। सुबह तो नया स्वेटर… जो अंबिका ने बड़े प्यार से उसके लिए बनाया था… पहनकर गए थे। “तुम्हारे हाथों में जादू है अंबिका। बहुत ही … Read more

वक़्त पर अपने ही काम आते हैं पड़ोसी नहीं – डॉ अनुपमा श्रीवास्तवा  : Moral Stories in Hindi

प्राइवेट नौकरी में सब कुछ है पैसा है, रुतबा है, शोहरत है। अगर नहीं है तो बस समय और सुकून नहीं है। आदमी अपने ही घर में पड़ोसी सा हो जाता है। लेकिन किया भी क्या जा सकता है जिंदगी जीने के लिए घर की चौखट लांघ कर परदेसी बनना ही पड़ता है। आज के … Read more

लंचबॉक्स – प्रियंका सक्सेना  : Moral Stories in Hindi

शहर से दूर एक छोटे से शहर नूरपुर में सुबह होते ही बच्चे अच्छे धुले साफ़ सुथरे कपडे पहनकर हाथों में बस्ता लेकर विद्यालय की ओर चल पड़े।  सरकारी विद्यालय नूरपुर में छठी कक्षा में मास्टरजी के आते ही सभी बच्चों ने समवेत स्वर में गाकर उनका स्वागत किया। होने को तो बच्चे अभिवादन कर … Read more

और बोलो मीठे बोल? – रोनिता कुंडु : Moral Stories in Hindi

अच्छा, गोलू की 15 दिन की छुट्टी हो गई? वाह! यह तो अच्छा हुआ, तो फिर तू आ जा ना यहां! सुमन जी ने फोन पर अपनी बेटी कंचन से कहा  कंचन:  क्या मां आप भी.? आपका बस चले तो मैं वही रहूं, पर भाभी? उनसे भी तो पूछ लो? वह क्या सोचेगी जब देखो … Read more

शक का कीड़ा-मनीषा सिंह : Moral Stories in Hindi

बस दीदी बस•• बहुत हो गया ••अब इतनी भी बेज्जती मत करो मेरी•••! मैं तो यहां सिर्फ तुम्हारे लिए आई  और तुमने मेरे कैरेक्टर पर ही सवाल खड़ा कर दिया •••? मममममम•• मेरा•• मतलब कहने का ये नहीं था छोटी••!  कहते हुए रजनी के हाथ पैर ठंडे हो गए। वह अंदर ही अंदर कांपने लगी … Read more

बड़ा दिल – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral Stories in Hindi

******** आज फिर मम्मी ने सदैव का अपना वही ब्रह्म वाक्य दोहरा दिया – ” ‌तुम बड़े भाई हो। तुम्हारा कर्तव्य है अपने छोटे भाई का ख्याल रखना। तुम्हारा बड़ा दिल होना चाहिये क्योंकि बड़ा भाई तो बाप की जगह होता है।” बचपन से ही चन्द्रार्क यही सुनता आया है। दो वर्ष का ही था, … Read more

बड़ा दिल किसका – रश्मि झा मिश्रा : Moral Stories in Hindi

…”तू यह कंबल झोले में डाल… मैं अभी आया… उस चौक पर कोई फिर कंबल बांटने आया है…!” ” जल्दी जाओ बाबा…!”  ” हां… तू यहीं बैठी रहना… मैं अभी आया…!”  लगभग घंटे भर में बैसाखी टेकता वह लौट आया… हाथ में एक कंबल गोल कर… अपनी फटी कंबल में घुसाए हुए था… ” वाह… … Read more

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