आत्मलाप – डाॅ उर्मिला सिन्हा : Moral Stories in Hindi
नियति कैसा कैसा खेल खेलाता है…जिसे इंसान का दंभी मन समझ नहीं पाता। जब अपना कर्म सामने आता है तो सिर्फ पछतावे के कुछ भी हासिल नहीं होता। अपने कमरे के बेड पर छटपटाते…एक घूंट पानी के लिए तरसते… अपनों की मीठी बोली की आस लिये रमेश बाबू तड़प रहे थे। “क्यों आज कैसा दिल … Read more