खिलाड़ी – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

  “कहाँ पर वर्क कर रही हो..,मतलब किस कंपनी में…..”नितिन के फ्रेंड अमित ने पूछा, तो लतिका की आँखों में एक अनकहा दर्द उभर आया, लेकिन अपने को संभाल कर मुस्कुरा कर बोली “कहीं नहीं….”…।.रसोई में आ आँखों के किनारे लटके उस बूंद को साफ कर ली, जो अक्सर उसकी आँखों के कोर पर लटक आते.., … Read more

माँ की ढाल – रश्मि श्रीवास्तव शफ़क़ : Moral Stories in Hindi

मीरा बालकनी में खड़ी बारिश की बूंदों को निहार रही थी और मन में कहीं घनी बारिश का शोर था।अबतक बस सहते चले आना का दर्द इस कदर भर गया था कि कब आँसू छलक कर बहने लगे थे,उसे पता भी नहीं चला अचानक कंधे पर एक स्पर्श पाकर वह चौंकी और सामने अपनी पुरानी … Read more

दूसरा पड़ाव – रवीन्द्र कान्त त्यागी : Moral Stories in Hindi

शाम के पाँच बजे ही आसमान में एकदम अंधेरा सा छा गया था। लगता था तेज आंधी या बरसात आने वाली है। घुमड़ घुमड़कर काली घटाएँ आसमान पर चढ़ी जा रही थीं। पंछियों के झुंड किसी आपदा की सी आशंका से समूह बनाकर आकाश में उड़ान भरने लगे थे। “एक रोटी और लाऊं क्या साब।” … Read more

काठ सी सख्त जिंदगी – पूनम भटनागर : Moral Stories in Hindi

आस्ट्रेलिया से लौटते हुए मिहिका विमान में बैठी अभी दोपहर बाद के बारे में ही सोच रही थी, रह रह कर उसे मिली ये ट्राफी  खुशी का अहसास करा जाती थी। वह सुबह वह दो दिन आस्ट्रेलिया में रही, आस्ट्रेलिया उसे एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था। … Read more

आने वाले का क्या कसूर – अर्चना सिंह : Moral Stories in Hindi

बहुत सुस्त और गमगीन सा माहौल लग रहा था । घर – आँगन सजे हुए होकर भी मायूसी की कहानी कह रहे थे , अजीब सा सन्नाटा पसरा हुआ था । न जाने इतने रौनक वाले घर से हँसी ठिठोली अचानक कहाँ गायब ।प्रभात जी ने रिटायरमेन्ट से पहले ही इस घर को बड़े शौक … Read more

चोंचले – चांदनी खटवानी : Moral Stories in Hindi

संदीप नौ बजे ऑफिस के लिए निकल गए.. उसके बाद करूं क्या! पूरे घर के चार चक्कर लगाकर आई.. कहीं कुछ फैला नहीं बिखरा नहीं.. सब जस का तस पड़ा था.. घड़ी में देखा तो अभी दस ही बज रहे थे.. हे राम! अभी तो सारा दिन पड़ा है.. कटेगा कैसे! अमन को बाहर गए … Read more

“अनकहे दर्द” – डॉ अनुपमा श्रीवास्तवा : Moral Stories in Hindi

“हैलो ….हैलो… हैलो …  हैलो…  माँ… माँ …..माँ ?” “रिंग तो हुआ है और शायद कल भी रिंग हुआ था। किसी ने फोन उठाया भी था पर उधर से कोई आवाज नहीं आई । माँ ही होगी….! लेकिन… माँ रहती तो कुछ तो बोलती…!”    खुशी इधर लगभग महीने भर से अपनी माँ से बातें करने … Read more

अनकहा दर्द – वीणा सिंह : Moral Stories in Hindi

कितनी कोशिश करती हूं पर ये आंसू निकल हीं आते हैं…. पति की बेरूखी और सपाट व्यवहार को बर्दाश्त करती रही बच्चे मुझे समझेंगे पर बच्चे भी….                       बचपन में मां मुझमें और छोटे भाई में फर्क करती थी तो मासूम मन रो उठता…. छोटे भाई राजन को बहला फुसला कर मलाई वाली दूध पिलाती, मेरे … Read more

चुमावन – सिम्मी नाथ : Moral Stories in Hindi

जेठ की दुपहरी और  टमटम से धीरे — धीरे बिलकुल अनजान सड़क पर  गुड़िया  सिमटी सिकुड़ी बढ़ी जा रही थी,  प्यास से बुरा हाल था ,कभी थोड़ा सा घूंघट  से कोर से कनखियाकर  अपने पति को देखती ,लेकिन वो तो घर पहुंचने की जल्दी में था । घर ..नहीं वो  गांव के एक प्रतिष्ठित  मुरारी … Read more

“कड़वा सच” – कुमुद मोहन : Moral Stories in Hindi

” आज हमारे परिवार में एक डॉक्टर और जुड़ गया!अब से मेरी बेटी डॉक्टर नीना मेरे साथ मेरी क्लीनिक में बैठेगी “! नीना के पिता डॉक्टर रवि चंद्रा ने गर्व और खुशी से कहा! वे बहुत खुश थे कि उनकी तीसरी पीढ़ी भी डॉक्टर बन गई!  “क्या मतलब नीना आपके साथ क्लीनिक पर बैठेगी?अरे भई … Read more

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