कामचोर-मनीषा सिंह : Moral Stories in Hindi

 “शोभा के बेटे की शादी” अब तक नहीं हुई !उम्र कम नहीं 40 का हो गया•• परंतु एक भी रिश्ता नहीं आ रहा !शोभा जी की पड़ोसन कमला अपनी सखी शकुंतला से बोली।  हां बहन••! लड़की की शादी में अगर देर  हो जाए तो बात समझ में आती है पर यहां तो शोभा बहन, अपने … Read more

अगर आपकी बेटी होती तो? – मधु वशिष्ठ : Moral Stories in Hindi

——————–         आज मानसी की जगह सीढ़ियों से उतरकर पवन को रसोई की ओर आते देख भावना जी बर्तनों को और जोर-जोर से फेंकने लगी। इससे पहले कि पवन कुछ बोलता भावना जी चिल्ला कर बोली महारानी अभी सो ही रही है। सुबह उठकर सारे घर का काम करना मेरी ही जिम्मेदारी है। उसे पता नहीं … Read more

ममतामयी बड़ी बहू – गीता वाधवानी : Moral Stories in Hindi

सरस्वती देवी का भरा पूरा परिवार था। बड़ा बेटा मुरली और उसकी पत्नी राधा, और उनके दो बेटे। मंझला बेटा कपिल और उसकी पत्नी कावेरी, छोटा बेटा नयन और उसकी पत्नी नेहा। मंझले बेटे के तीन बच्चे थे, दो बेटियां और एक बेटा और छोटे वाले बेटे के दो बेटियां थी। सरस्वती देवी के पति … Read more

कितने जतन से पाला पोसा बेटा तुम्हे – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

तुझे पाल-पोस कर इतना बड़ा किया था बेटा और तू चार दिन के प्यार के लिए मां बाप को छोड़ देगा। कहां है बेटा तू इतनी रात हो गई तू घर क्यों नहीं आया।मैं घर नहीं आऊंगा मां जबतक आप लोग मेरी बात नहीं मानोगे।वो लड़की कैसी है क्या पता तेरे लिए ठीक है कि … Read more

ठगा सा – कंचन श्रीवास्तव आरज़ू : Moral Stories in Hindi

वर्षो से एक ही जूता पहन रहे हमेश बाबू का जूता अब घिस गया था जिसके लिए पत्नी कई बार टोक चुकि थी कि अरे ! नया ले लीजिए पर वो थे कि घसीट रहे थे और आज तो वो ज़िद पर ही अड़ गई कि नही आज तो आपको लेने जाना ही पड़ेगा  चाहे … Read more

किस्मत – मोनिका रघुवंशी : Moral Stories in Hindi

हैलो मैं मोहन कुमार बोल रहा हूँ क्या श्यामा चरण जी से बात हो सकती है। दूल्हे के पिता का नाम सुनते ही दुल्हन के मामा श्यामाचरण जी फोन की ओर लपके हां हां समधी जी बोलिये न मैं… उमा का मां ही बोल रहा हूँ। वो क्या है न समधी जी… कैसे बताऊं मेरा … Read more

बड़ी बहू – अर्चना सिंह : Moral Stories in Hindi

“अम्मा नहीं रहीं अपर्णा भाभी ” ! सीमा की रूखी मगर झकझोर देने वाली आवाज़ सुनकर अपर्णा  के मन में ससुराल के प्रति दायित्व हिलोरें ले रहा था लेकिन कोई उचित राह दिखाने वाला नहीं था । अपने ऊपर लगे हुए आरोप – प्रत्यारोपों , लांछन सबको दरकिनार करते हुए वह दोनों बेटियों को लेकर … Read more

माँ की आखिरी चिट्ठी – डॉ ममता सैनी : Moral Stories in Hindi

रेलवे स्टेशन की उस बेंच पर बैठी **सुमन** ठंडी हवाओं से बेपरवाह, एक पुराना लिफाफा हाथ में लिए डबडबाई आंखों से उसे निहार रही थी। भीड़भाड़ वाले प्लेटफॉर्म पर कोई उसे देखता भी तो शायद यही समझता कि वह किसी के इंतजार में बैठी है। लेकिन उसकी आंखों में इंतजार नहीं, एक अधूरी दास्तान थी—जो … Read more

बड़ी बहू – विनीता महक गोण्डवी : Moral Stories in Hindi

मालती देवी के तीन पुत्र और दो पुत्रियां थी। बड़ा बेटा पढ़ने में बहुत अच्छा था। वह एमबीबीएस की तैयारी कर रहा था। गांव समाज के लोग शादी का दबाव डाल रहे थे और दीपक अभी शादी के लिए तैयार नहीं था। मालती देवी का स्वास्थ्य भी खराब चल रहा था। सभी बच्चे शादी के … Read more

दुख पहले सुख बाद में – ऋतु दादू : Moral Stories in Hindi

निशी  सुबह सुबह घर व्यवस्थित करने में लगी थी कि फोन पर सूचना मिली कि उसके चाचाजी नहीं रहे, वह जल्दी से बाहर आई तो देखा उसके सास,ससुर, चाची सास, चचिया ससुर और उसके पति सब एक साथ बैठकर उसके चचेरे देवर के विवाह के बारे में विचार विमर्श कर रहे थे, जिसका  मुहूर्त अगले … Read more

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