चुभता सावन –   कविता भड़ाना

सावन की झड़ी लगी हुई है,रह-रहकर भयंकर गर्जना करते काले बादल और मूसलाधार हो रही बारिश से मौसम बहुत ही सुहाना हो रहा है। हरे भरे पेड़ भी झूम-झूम कर अपनी खुशी का इजहार कर रहे हैं और मिट्टी की सौंधी सौंधी खुशबू वातावरण को मादक बना रही है। 60 बसंत देख चुकी कुसुम जी … Read more

बैरी पिया….. – रश्मि प्रकाश

बहुत दिनों से घर में बंद बंद सौम्या का मन उचाट सा हो गया था.. पति अनुज सप्ताह के छह दिन ऑफिस और एक छुट्टी में घर में पाँव पसार कर सोया रहता…. ऐसे में सौम्या करें तो क्या और अकेले बाहर उसे जाना पसंद नहीं था… हर बार नई जगह जाकर दोस्त बनाना उसने … Read more

मेरा कन्यादान मेरी मॉं का हक क्यों नहीं ? – रश्मि प्रकाश

“राशि बेटा देख ये साड़ियां कैसी है? ”कहती हुई मॉं ने चार पाँच साड़ियाँ उसके सामने फैला दी “बेटा तुम्हारी शादी है और तुम ही मुंह फुलाकर बैठी हो? घर में सबकुछ मुझे ही देखना है ना बेटा तेरे भाई भी अभी छोटे हैं …..तुम मदद नहीं करोगी तो मैं अकेले कैसे संभालूं? तुम्हारे पापा … Read more

प्रीत का दामन छूटे ना – गुंजन आनंद गोगिया

उत्तराखंड की पहाड़ियों में होने वाली बरसात का तो कोई मुकाबला ही नहीं है। ये बात उन दिनों की है जब मोबाइल फोन का चलन शुरुआती दौर में था। जिसके कारण हर इंसान ना तो महंगे मोबाइल खरीद सकता था और ना हर जगह उसके सिग्नल मौजूद थे। आम आदमी टेलीफोन पर ही निर्भर था।आज … Read more

बीत गई है स्याह विभावरी – अर्चना कोहली ‘अर्चि’

मूसलाधार बरसात में झरोखे के पास बैठी आकांक्षा का मन एक अबोध शिशु की भाँति खुशी से हिलोरें लेने लगा।आखिर हो भी क्यों न! तमस भरी रात्रि के अवसान पर सूर्योदय के समान उसके जीवन में भी तो सतरंगी प्रकाश फैल गया था। अभी कुछ दिन पहले की तो बात है, जब कैंसर के खिलाफ़ … Read more

बस नंबर पच्चीस ग्यारह  – अंकित शर्मा

वह एक अंधेरी रात थी । काले बादलों ने आसमान के ऊपर अपना घर बनाया हुआ था कि मानो बस अभी बरसने ही वाले हों । दूर – दूर तक कोई आवाज़ नहीं , सिवाय झींगुरों के । वह एक घना सुनसान जंगल था ,  जिसके बीचों-बीच से निकली एक कच्ची सड़क आसपास के गांवों … Read more

सफर – अनुपमा

मां का फोन आते ही शिवानी ने कुछ कपड़े  बैग मैं रखे और सीधे स्टेशन आ गई , मौसम बहुत खराब था , तेज बारिश हो रही थी , स्टेशन पर भी इक्का दुक्का लोग ही थे , और उसके शहर की ओर जाने वाली गाड़ी मैं तो वैसे भी कम ही सवारियां होती है … Read more

सावन की पहली बरसात – संगीता त्रिपाठी

आकाश में घने मेघ छाये थे, रह -रह कर बिजली कड़क रही थी। रंजना कॉलेज के गेट से बाहर निकली तभी जोर की गर्जना हुई बड़ी -बड़ी बूँदों के साथ बारिश शुरु हो गई। रंजना  ठिठक गई, ना पीछे जा सकती ना आगे जा सकती,दो राहे पर खड़ी थी सोच नहीं पा रही थी क्या … Read more

 वो कागज़ की कश्ती वो बारिश का पानी – लतिका श्रीवास्तव

वो सुनहरे बचपन के दिन बरबस ही सजीव हो उठते हैं… जब बारिश की झड़ी लगती है…जगह जगह पानी भर जाता है ..तब मेरा मन अपनी बचपन की उसी टीचर्स कॉलोनी में पहुंच जाता है और उन छोटी छोटी कागज़ की बनाई नावों को ढूंढता है जो मैं बचपन में अपने घर के आस पास … Read more

सांध्य बेला – वीणा

शाम की नीरवता वातावरण में छाई हुई थी। पक्षी दिन भर उड़ने के बाद वापस अपने घोंसलों में लौट रहे थे। सूर्य की लालिमा धीरे-धीरे अंधेरे के आगोश में समाती चली जा रही थी।    इसी शाम के झुरमुट में रागिनी न जाने कब से तन्मय का इंतजार कर रही थी। कलाई घड़ी देखते- देखते वह … Read more

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