हमकदम – बरखा शुक्ला

नेहा के ससुराल में आज उत्सव सा माहौल था । किचन से व्यंजन बनने की ख़ुशबू सारे घर में फैल रही थी ।और हो भी क्यों न उसकीननद सीमा को देखने लड़के वाले आ रहे थे । पढ़ी लिखी सीमा दिखने में भी खूबसूरत है , लड़का भी अच्छी नौकरी में है ।फ़ोटो देख उन्हेंसीमा … Read more

जरा सी परवाह – नीरजा कृष्णा

वो बेटी दामाद के बहुत बुलाने पर उनके घर आई हुई थीं। बहुत संकोच में रहती थीं…भला कोई कितने दिन बेटी के घर आसन जमा सकता है। दामाद विवेक को समय मिलने पर घर के कामों में वीनू की मदद करते देख बहुत अजीब सा लगता था। उस दिन  विवेकजी की छुट्टी थी। वीनू ने  … Read more

काली पन्नी – कंचन श्रीवास्तव

***”””””””****** एक टक घोंसले को  निहारते हुए बेटे ने रीमा से पूछा , अम्मा चिड़िया घोंसला क्यों बनाती है तो उसने कहा बेटा हर मौसम तो बाहर रह कर गुजार सकती है पर……..।इतने में राजू ने आवाज लगाई अम्मा देखो ना यहां भी आखिर हम कहां जाएं ,कुछ समझ नहीं आता। उसी में मिलती जुलती … Read more

बावड़ी की चुड़ैल – गरिमा जैन

सुधीर गाड़ी स्टार्ट नहीं होगी भीग भीग कर तबीयत खराब हो जाएगी ।इतनी रात में कोई मैकेनिक भी नहीं मिलेगा। सुधीर : लता तुम ही बताओ क्या कर सकते हैं? एक तो ऐसा इलाका ,ऊपर से शिमला की ठंड । लता : इलाका ओ कम ऑन सुधीर! तुम भी क्या उन बेकार की कहानियों पर … Read more

*विश्वास का हाथ* –  नम्रता सरन “सोना”

“आशी, बेटा ,ज़रा पापाजी को चाय बना दे बेटा, मेरे पैर मे बहुत दर्द है” राजेश्वरी जी ने बहू को पुकारा। “रहने दे बेटा, मुझे नहीं पीनी चाय” असीत जी जल्दी से बोले। “आप नही सुधरेंगे, आपको मेरे हाथ की चाय ही पीना है, है न” राजेश्वरी जी ने तिरछी नज़रों से पूछा। “जब मालूम … Read more

बादलों में दामिनी – ज्योति अप्रतिम

**************** रातभर पानी गिरा था। झोपड़ी और उसके बाहर दूर -दूर तक पानी ही पानी नज़र आ रहा था। झोपडी में भी कमर तक पानी भर गया था।दूर तक घर के टीन और एल्युमिनियम के बर्तन बहते नज़र आ रहे थे।मंगलू और उसकी पत्नी रात भर से पानी मे दो साल की गुड्डी को लेकर … Read more

*महा बेइमान** – मधुसूदन शर्मा

“चाय जरा जल्दी मंगाओ यार ! मुझे जाना है।” मनीष ने घड़ी देखते हुए कहा। “अभी तो शाम के छह ही बजे हैं, इतनी जल्दी घर जाएगा।” विनय ने आंखें गोल-गोल घुमाते हुए कहा। “अरे नहीं यार! तुम लोगों को तो पता ही है, अपना बचपन का यार गिरधर, इस जिले में बड़ा अफसर बनकर … Read more

ट्रेन की यात्रा – सीमा नेहरू दुबे

गनीमत है ज़िंदगी पूरी ना सही पर थोड़ी तौं लाइन पर आ रही है और ट्रेन का सफर उसी नोर्मल ज़िंदगी के सफर का हिस्सा है। मुझको भी बड़े दिनों बाद ट्रेन का सफर नसीब हुआ, वाह! क्या कहने!  मुझे तौ सच मे ये सफर बहुत सुहाना लगता है आप बैठे है और बाहर देखो … Read more

वो खौफनाक रात – कमलेश राणा

25 दिसंबर की वो खौफनाक रात जब भी याद आती है,,रोंगटे खड़े हो जाते हैं,,   उस दिन बड़े बेटे की बर्थडे थी,,सभी लोग बड़े खुश,,तय हुआ कि डिनर ग्वालियर में होटल में करके,,45 किलोमीटर दूर अपने गृहनगर लौट जायेंगे,,   डिनर 11बजे समाप्त हुआ ,,,पूरा परिवार साथ था,,दोनों बेटे,बहू,उसके दो बच्चे,हम पति-पत्नी और एक … Read more

 ‘ बरसात की वो रात..’ – विभा गुप्ता

 साक्षी ने रिपोर्टिंग का सारा सामान अपने हैंडबैग में रखा और कोर्ट जाने के लिए जैसे ही वह ऑटो में बैठी कि झमाझम पानी बरसने लगा। “ओफ्फ़ो,इस बारिश को भी अभी ही आनी थी, आज ‘ कमली केस ‘का फ़ैसला होना है, देर हुई तो पूरी रिपोर्ट देवकी तैयार कर लेगी और मेरा प्रमोशन फिर … Read more

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