“दिव्याश्रम- जया यादव

 दिव्याश्रम में दो दिन से तनाव पूर्ण वातावरण बना हुआ है। दीदी माँ श्वेताम्बरीजी अपने क्रोध पर अँकुश नहीं कर पा रही थीं । आज तक दिव्याश्रम में ऐसा नहीं हुआ कि कोई साध्वी आश्रम का परित्याग करके वापस साँसारिक होने की बात करे।  कितना समझा रही हैं वे श्रद्धेश्वरी को, पर उसने तो जिद … Read more

अधूरे ख्वाब – इंदु कोठारी

अनुराधा  बहुत खुश थी , पर नींद आंखों से कोसों दूर ,मन में उथल-पुथल । उसने थोड़ी देर के लिए आंखें बंद करनी चाहीं ।कि तभी दूसरे कमरे से एक फिल्मी गाने की धुन…सुनाई पड़ी। रोहन अक्सर इसी गाने को गुनगुनाया करता था । ओह ! कितने सालों बाद आज बरबस ही यह धुन…उसको अपनी … Read more

सर्वोच्च बलिदान…- साधना मिश्रा समिश्रा   

अरुण सिर्फ़ एक साल बड़ा था वरुण से। छः साल का वरूण और सात साल का अरुण। दोनों भाई आधे घंटे से अपने टैम्पो का इंतजार कर रहे थे जो उन दोनों को रोज प्राथमिक विद्यालय लाती और ले जाती थी लेकिन आज अभी तक आई ही नहीं थी। घर पांच किलोमीटर की दूरी था। … Read more

कुछ दिल ने कहा !!! – के. कामेश्वरी

लीला स्कूल से आकर उदास बैठी थी । वासंती ने बहुत कोशिश की कि वह कुछ बोले पर लीला चुप थी । वासंती को मालूम है कि लीला ज़्यादा देर तक चुप नहीं रह सकती । हाथ पैर धोकर खाना खाते हुए लीला वासंती से कहने लगी… देखो न माँ पिछली बार जब रक्षा पेंसिल … Read more

बहना चाहे भाई का प्यार-सुधा जैन  

अनुराधा के बेटे अनुराग की शादी है ।अनुराधा अपने पति आनंद के साथ शादी की तैयारी कर रही है, पर मन में बार-बार एक कसक सी उठती है …और कसक मायके को लेकर है। 10 वर्ष हो गए उसे मायके से संबंध तोड़े हुए …. तबसे ना मम्मी पापा को देखा, और ना भैया ,भाभी, … Read more

किराए का घर – तृप्ति शर्मा

सारा घर पोटली बने हूए सामान से घिरा हुआ था तभी राघव की आवाज़ आई, “जानवी ओ जानवी समेट लिया घर, बांध लिया सारा सामान तुमने?,” जानवी सोचती रह गई, “समेट लिया घर”  ये वाक्य उसके दिमाग में बार बार आता जाता रहा। अभी जैसे कल की ही बात हो वह अपने पति और दो … Read more

” यह कैसी बरसात…? ” –  रणजीत सिंह भाटिया 

 बरसात अपने पूर्ण वेग पर थी l  रजत छतरी लेकर भी पूरी तरह से भीग गया था l ऑफिस से घर थोड़ी ही दूरी पर था lतो पैदल ही आना जाना होता था l घर पहुंचकर रजत ने दरवाजा खटखटाया पत्नी सुधा ने दरवाजा खोला  ”  अरे आप तो पूरे भीग गए चलो कपड़े बदल … Read more

अनकहा प्यार – प्रियंका त्रिपाठी ‘पांडेय’

काले काले बादलो ने आसमान मे डेरा डाल दिया।मुक्ता तेजी से लान की तरफ दौड़ी, सूखे हुए कपड़ो को हटाने के लिए। बूंदो ने झमा झम बरसना शुरू कर दिया। कपड़े उतारते-उतारते मुक्ता काफी भीग चुकी थी।अन्दर आते ही उसने छींकना शुरू कर दिया। मा॑ बड़बड़ाते हुए बोली – “मुक्ता मैंने तुझसे कितनी बार कहा … Read more

भूत की उपस्थिति – भगवती सक्सेना गौड़

नोट…कमजोर दिलवाले न पढ़े अजय सोने की कोशिश में लगे थे, पर नई जगह उसे नींद भी नही आ रही थी। आज ही दिल्ली में नए किराए के फ्लैट में रहने आया था। आधी रात को झपकी आयी, तो एकाएक लगा कोई उसके बिस्तर पर लेटा है, कूदकर उठ बैठा। लाइट जलाई तो कोई दिखा … Read more

वो गुलाबी दुपट्टा – सरला मेहता

” वीरा ओ वीरा ! कहाँ है बहना, राखी नहीं बाँधनी तुझे। ” निहाल पूरे घर में चक्कर लगा चुका है। लेकिन वीरा छत पर खड़ी पड़ोस वाले घर को देख अतीत की यादों में खोई है,,, ” इसी घर में उसका सबसे अच्छा दोस्त रहता था। दो शरीर व एक जान थे वे। शेरा … Read more

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