बहू ये तुम्हारा कंगला पीहर नहीं संपन्न ससुराल है – संगीता अग्रवाल
रविवार की सुबह सरगम अपने बालकनी में खड़ी थी क्योंकि आज पति की छुट्टी रहती हैं इसलिए नाश्ता तैयार नहीं करना होता है. आराम से बालकनी में खड़े होकर ठंडी ठंडी हवा का लुत्फ ले रही थी. तभी उसकी नजर नीचे गली में पड़ी शर्मा जी अपनी बेटी से कह रहे थे, “नहीं बेटा क्यों … Read more