जिन्दगी आपकी फैसला किसी और का – कुमुद मोहन
पति के देहांत के बाद प्रीति जी अपने बेटे कमल के पास गुरुग्राम आ गई थी। बेटा अभी कुँवारा था तो बेटा जब ऑफिस चला जाता तो घर खाली रह जाता, इसीलिए शाम को नियमित रूप से सोसायटी के पार्क मे टहलने जाती थीं। एक दिन टहलकर पार्क के बेंच पर बैठ आराम कर रही … Read more