उपेक्षा – मुकुन्द लाल

भरत अपने ममेरे भाई की शादी में ननिहाल आया हुआ था। मामा के अन्य रिश्तेदारों का रहन-सहन और आकर्षक डिजाइन के महंँगे लिवास के सामने वह अपने पोशाक को तुच्छ महसूस करने लगा। उसके पास स्वेटर, मफलर के साथ मात्र दो सेट मामूली कपड़े थे।   प्रारम्भ में उसके मामा रमाशंकर ने हाल-सामाचार पूछने की औपचारिकता … Read more

बुरा सपना – प्रियंका त्रिपाठी ‘पांडेय’

‘मां मुझे अभी शादी नही करनी, मुझे सिविल की तैयारी करनी है।’, संजना ने मां से कहा ‘ठीक है बेटी मत करना, एकबार देख तो ले…देखने मे क्या हर्ज है। इकलौता लड़का है…सुंदर स्मार्ट सरकारी नौकरी है। परिवार बहुत छोटा है,तू आराम से वहां अपनी तैयारी कर सकती है।देखले ऐसे रिश्ते बार-बार नही मिलते।’, मां … Read more

निर्णय  – डा.मधु आंधीवाल

सब आ चुके थे रजत की तबियत अधिक बिगड़ती जा रही थी । उर्बि को कुछ समझ नहीं आ रहा था । वह अपने को बहुत संभाले हुई थी । बच्चे बाहर थे दोनो बेटियाँ और बेटा  सब शाम तक आजायेगे । रजत की लापरवाही से बीमारी बढ़ती गयी । अभी बच्चों की पूरी जिम्मेदारी … Read more

हिम्मत – रीटा मक्कड़

संगीता की शादी को अभी कुछ महीने ही हुए थे। उसने नोटिस किया कि उसके ससुराल में उसके बड़े ननदोई जी का कुछ ज्यादा ही दबदबा है।उनकी छवि ही सबके सामने ऐसी बन चुकी थी कि ससुराल में कोई भी काम उनसे पूछे बिना और उनकी मर्जी के बिना नही होता था।सास ससुर भी उनको … Read more

भले घर की  बहू यह काम करेगी – गीतू महाजन

लॉकडाउन लगा तो मानसी का भी काम पर जाना बंद हो गया। “चलो.. इसी बहाने तुम कुछ आराम तो करोगी मां”, बेटी तुली ने कहा।  “बिल्कुल.. अब छोड़ दो यह सब मां… बहुत कर लिया तुमने.. अब किस चीज़ की कमी है.. या तुम्हें हम पर भरोसा नहीं”, बेटा किशोर भी बोला था। ” तुम … Read more

लालच बुरी बला – सरला मेहता

खुशहाल परिवार की तीनों बहुएँ जब तब गुफ़्तगू करती रहती हैं…  अमीर मायके वाली बड़ी बहू कहती है, ” ये अम्मा जी ने बिस्तर पकड़ लिया है। पर इनकी टाँग तो ऊँची। हमारे पीछे ही पड़ी रहती है। “ मझली कहाँ पीछे रहने वाली, ” हाँ दीदी ! देखो ना लंदन से मेरे भैया ने … Read more

बहुत स्वाभिमानी थी अम्मा – उमा वर्मा 

अम्मा की बरसी है आज।निधि अपने भाई के घर सवेरे ही आ गई थी ।घर में कोई चहल-पहल नहीं है ।बस वह और भाई का परिवार ।एक साथ खाना पीना और अम्मा को याद करना चाहती है वह ।अम्मा को भी तो कोई आडम्बर पसंद नहीं था । बेकार के दिखावे का हमेशा विरोध किया … Read more

मैं भिखारी नहीं हूँ आंटी जी – निभा राजीव “निर्वी”

अनुराधा अपने 8 वर्षीय पुत्र शौर्य को उसके जन्मदिन के अवसर पर उसे लेकर खिलौनों की दुकान पर उसे खिलौने दिलाने आई थी।शौर्य बहुत उत्साहित होकर पूरी दुकान घूम घूम कर देख रहा था और अपने खिलौने पसंद करता जा रहा था। अनुराधा उसके साथ चलती हुई मुग्ध भाव से उसे देखती जा रही थी। … Read more

आत्मसम्मान – कंचन श्रीवास्तव आरज़ू

  जवाब न देना सम्मान था पर खुद के हक के लिए लड़ना आत्मसम्मान हां आत्मसम्मान,यही तो कह गए थे बाबा कि बेटा सब कुछ सहना पर आत्मसम्मान पर आंच आए तो एंडी चोटी का जोर लगाकर सच साबित कर देना ,ताकी आगे से कोई उंगली उठाने की हिम्मत न करें।वरना ,तुम नहीं जानती अबला … Read more

बेटे की इज़्ज़त इज़्ज़त और बहू की ? –  संगीता अग्रवाल

नितिका ने हॉस्पिटल से निकल राहत की सांस ली मानो कितने सालों से जो सांस अटकी थी वो अब आई हो..उसने जल्दी से ऑटो पकड़ा और घर को रवाना हुई । ऑटो मे बैठ उसने सिर पीछे टिका दिया …अतीत की कितनी बाते चलचित्र सी घूमने लगी सामने जिन्हे याद कर कभी उसके चेहरे पर … Read more

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