सच्चा रिश्ता देह का  – स्मिता सिंह चौहान

अच्छा मामी जी ,आप मांजी के साथ चाय पीयो मै अपनी एक्सरसाइज की क्लास हो आऊ।” नैना ने अपनी मामीजी से बोला। “अरे हम कौन सा रोज ,रोज आते है ।चार दिन बाद तो हम चले जाऐंगे।कौन सा मैराथन मे दौड़ना है जो दो चार दिन की परैक्टीस ना होएगी तो हार जायेगी।”मामी जी ने … Read more

जिन्दगी आपकी फैसला किसी और का – कुमुद मोहन 

पति के देहांत के बाद प्रीति जी अपने बेटे कमल के पास गुरुग्राम आ गई थी। बेटा अभी कुँवारा था तो बेटा जब ऑफिस चला जाता तो घर खाली रह जाता,  इसीलिए शाम को नियमित रूप से सोसायटी के पार्क मे टहलने जाती थीं।  एक दिन टहलकर पार्क  के बेंच पर बैठ आराम कर रही … Read more

“पक्की सहेली” – नीरजा नामदेव

गाथा ने 6वी जब नए स्कूल में प्रवेश लिया तो यहां उसे एक नई सहेली मिली जिसका नाम था कथा। दोनों एक दूसरे का नाम सुनकर मुस्कुराने लगी क्योंकि दोनों के नाम का अर्थ एक ही था। धीरे-धीरे दोनों पक्की सहेलियां बन गई। कथा ने एक दिन गाथा से कहा” कल तुम घर में पूछ … Read more

यादें तो मन में होती हैं – अर्चना कोहली “अर्चि”

शुभा की तेरहवीं का  कार्य  संपन्न हो जाने के बाद बेटे और बहू ने रमेश से कहा- “पिताजी आप हमारे साथ चलिए। अकेले कैसे रहेंगे! पहले भी आपसे और माँ से बहुत बार कहा, पर आपने हर बार इनकार कर दिया।” “नहीं बेटा। मैं नहीं चल पाऊँगा”। रमेश ने भरे गले से कहा। “पर क्यों … Read more

भावनात्मक बंधन – कंचन श्रीवास्तव

****************** उम्र के चौबीस बसंत पार करने के बाद आज जब ब्याह की तैयारी हो रही तो रेखा का मन जहां भावी पति को लेके जहां गुदगुदा रहा वहीं दूसरी तरफ नए परिवेश को लेके चिंतित भी हो रहा ,होना स्वाभाविक भी है  अभी तक जिन लोगों के बीच रही वो दादी- बाबा ,बुआ- फुफा,चाचा … Read more

“तिरंगा मेरी शान है” – ऋतु गुप्ता

मालिनी ओ मालिनी सुनती नहीं क्या, कल सुबह हमारा स्वतन्त्रता दिवस है,इस कम्युनिटी हॉल के बाहर मैदान में तिरंगा फहराया जाएगा, बड़े-बड़े लोग आएंगे, देशभक्ति का आलम होगा, और तू है कि अपने काम पर ध्यान ही नहीं देती, तुझे साहब ने बोला था ना कि गेंदे के फूलों की लड़ियां सभी दरवाजे पर लगा … Read more

ममता – मृदुला कुशवाहा

डॉ. अविनाश तेज गति से कार चला रहे थे । साथ में बैठी उनकी पत्नी नेहा और चार साल का बेटा विनय कुरकुरे और चिप्स खा रहे थे।  अविनाश बोला ,” यार नेहा ! तुम भी ना विनय के साथ कभी कभी बच्चा बन जाती हो। “ नेहा हँसी और बोली ,” अविनाश जी ! … Read more

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन…”  – *नम्रता सरन “सोना”*

“देखो तो अनंता, ये मुझे भुलक्कड़ कहते हैं, अभी मैंने इनसे पूछा कि आपने ऑइनमेंट रखा, तो बोले भूल गया, मैंने पूछा कि, माला रखी, तो बोले भूल गया, अब तुम बताओ , भुलक्कड़ मैं हूं या यह हैं, घुटनों के दर्द का आइनमेंट भूल आए, अब वहां जाते ही लेना पड़ेगा, और माला… उसके … Read more

नकाब से ढके चेहरे –  गीतांजलि गुप्ता 

रीना के घर जब भी जाती उस छोटी सी सोना को भाग भाग घर कर काम निपटाते देखती,बहुत तरस आता। बारह वर्ष की मासूम उम्र और इतना काम। घर की सफाई से लेकर बच्चा संभालने तक का काम रीना सोना से कराती। बिना किसी शिकायत के सुबह आठ से रात आठ बजे तक सोना खटती … Read more

मैं कहां फंस गई – अभिलाषा आभा

सीमा अपने साथ ससुर और देवर,देवरानी के साथ कोलकाता में रहती थी। सीमा का स्वभाव बहुत ही अच्छा था और वह एक सुघड़ गृहणी थी। घर के सारे काम समय पर करना, सास- ससुर की सेवा करना और देवर-देवरानी के साथ प्यार से रहना, उसे खूब आता था। उनकी की एक ननद थी, पुष्पा। जिसकी … Read more

error: Content is protected !!