घर से बेघर – विजय कुमारी मौर्य

जंगल के किनारे एक दरख्त…. के नीचे बैठे बुजुर्ग अपने दोनों हाथ ऊपर उठाकर अपने बच्चों के लिए दुआ मांग रहे थे, “हे ऊपर वाले माफ कर देना मेरे बच्चों को, शायद उनकी भी कोई मजबूरी होगी मुझे घर से निकालने की, या मेरी कोई कमजोरी। आज मेरी पत्नी जिन्दा होती तो शायद कोई रास्ता … Read more

कोई भी रिश्ता,स्वाभिमान से बड़ा नहीं – डॉ पारुल अग्रवाल

अंजली जिंदगी से भरपूर, हर पल को खुशी से जीने वाली लड़की थी। अपने मम्मी-पापा, दादा-दादी और छोटे भाई के साथ हंसी खुशी दिन बीता रही थी।बहुत अमीर तो नहीं थे वो लोग, पर बिरादरी में अच्छे खाते-पीते परिवार में उनकी गिनती होती थी। अंजली पढ़ाई में काफी होशियार थी,वो एक सामाजिक संस्था में जॉब … Read more

बहुरिया यह मेरा घर है और जैसा है वैसा ही रहेगा –  नीतिका गुप्ता 

नारायण  जी आगरा शहर के एक बहुत बड़े व्यापारी,, सुनीता जी उनकी धर्मपत्नी एक सभ्य, सुशील, आदर्श नारी…. बेटा जो पिता के व्यवसाय में मालिक बनने की इच्छा नहीं रखता बल्कि उसी व्यवसाय से संबंधित एक कंपनी में नौकरी करके अनुभव अर्जित कर रहा है,, बेटी जिसने अभी पढ़ाई पूरी की है और बच्चों के … Read more

वो मनहूस नौलखा – कुमुद मोहन

बिस्तर पर लेटी राधा छत पर घूमते पंखे की घूमती पंखुड़ियों को ध्यान से देख रही थी जिनके घूमने के साथ साथ जैसे वक्त का पहिया कई साल पीछे चला गया हो। सोचते सोचते यादों की किताब के पन्ने जैसे एक-एककर खुलने लगे। वक्त की स्याही धुंधली जरूर पड़ गई थी पर शब्दों के निशान … Read more

रक्षा मर्दन – रंजना बरियार  

शपथ ग्रहण के बाद माननीय मंत्री महोदय घर आने पर सीधे अपनीं अठासी वर्षीया माता जी के कमरे में पहुँचे… ”माँ… माँ आपका बेटा आज मंत्री हो गया है… वो भी आपका आशीर्वाद मिला तो समाज कल्याण विभाग ही मिलेगा…जिसके लिए मैं वर्षों से संघर्ष करता आया हूँ…” कहते हुए उन्होंने बिस्तर पर लेटी माँ … Read more

औरत का आत्मसम्मान  – बेला पुनीवाला

शादी के 15 साल बाद आज सुनीता के पति विशालने बातों ही बातों में किसी बात से नाराज़ होकर सब के सामने कहा, कि ” तूने आज तक किया ही क्या है ?  सिर्फ घर  पे खाना बनाना  और बच्चों को संभालना और वैसे भी आज कल बच्चें भी तुम्हारी बात कहाँ सुनते हैं ? … Read more

 मुन्ना का प्यार – बालेश्वर गुप्ता

   ये क्या बोल रहे हो, बेटा?तुम अमेरिका चले जाओगे तो हम इस उम्र में कैसे जी पायेंगे?यहाँ अपने देश में क्या कमी है, मुझे और तेरी मां दोनों को खूब पेंशन मिलती है, तुम भी कमा ही रहे हो, एक बंगला और एक फ्लैट हमारे पास है, बेटा वो सब हम तुम्हारे नाम कर देते … Read more

भाई हों तो ऐसे – कमलेश राणा

अर्चना का परिवार भरा-पूरा था,,चार भाई और तीन बहनें,,पिताजी सरकारी नौकरी में थे,,कोई चीज की कमी नहीं,, एक दिन अचानक पिताजी को हार्ट अटैक आया और हॉस्पिटल ले जाने से पहले ही उन्होंने दुनियां को अलविदा कह दिया,,यह परिवार के लिए बहुत बड़ा वज्रपात था,, सारे भाई बहन पढ़ रहे थे,,सब एक से बढ़ कर … Read more

अपने आत्म- सम्मान को अब चोट पहुँचने नही दूँगी – किरन विश्वकर्मा

सविता को आज बेटी रूही को दिखाने डॉक्टर के पास जाना था। उसे दो- तीन दिनों से बुखार आ रहा था।वह सास कमला जी के पास गयी और पैसे मांगे। कमला जी ने मुँह बनाते हुए उसे पैसे पकड़ा दिये। उसे यह देखकर बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा। पति अभय कभी नौकरी करते कभी नौकरी … Read more

हैसियत – सविता गोयल

 ” हूंह… एक भी सामान ढंग का नहीं दे रखा जो हमारे घर में रखा जा सके।  कपड़े लत्ते भी ऐसे दिये हैं कि सारे रिश्तेदारों के सामने हमारी नाक कट गई।  हमने तो सोचा था सरकारी मास्टर की इकलौती बेटी है तो कम से कम ब्याह तो ठीक से करेंगे … लेकिन यहां तो … Read more

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