“माँ की करधनी” – विजय कुमारी मौर्य”विजय”

रामखिलावन का बड़ा सुन्दर परिवार था। कई सालों बाद माँ फूलमती  की मिन्नतों से…. एक बेटा जन्मा था। रामखिलावन की माँ  उसकी रात-दिन सेवा करती बस दूध पिलाने के लिए ही बहू जानकी  की गोद में देती थी….. पोते के सवा महीने का होने पर उसका नामकरण और गाँव में दावत रखी उस दिन फूलमती … Read more

त्याग की पराकाष्ठा – तृप्ति शर्मा

अभी दो हफ्ते पहले ही पड़ोस में एक नया परिवार आया था । घर में मुखिया रामबाबू उनकी पत्नी ,दो बेटे और एक बेटी थी साथ मे थे। एक दो ढाई साल का छोटा सा बच्चा, सावले रंग का घुघराले बालों वाला,मासूम से चेहरे पर  काजल से काली हुई बडी बडी आंखे। बहुत ही प्यारा … Read more

क्यों पुरुष के त्याग की कोई कीमत नहीं – गीतू महाजन

राकेश आज थका मारा घर आया था।सुबह से ही दुकान पर बहुत भीड़ थी और आज उसके दो कर्मचारी भी छुट्टी कर गए थे इस वजह से दोपहर को खाना भी वह ठीक ढंग से नहीं खा पाया और रात तक आते-आते उसकी हालत पस्त हो गई थी।घर आते ही उसने अपनी पत्नी माला को … Read more

त्याग के उसूलों की हार –  प्रेम बजाज

सब कुछ तो साफ था मेरे सामने। सारे रास्ते खुले थे फिर क्यों नहीं जिंदगी को अपना सका मैं?  क्यों मैं  पीछे मुड़कर नहीं देख पाया? क्या यह जिंदगी मेरी जरा सी भी नहीं है? अगर इसे मैंने खुद चुना है तो अब  क्यों मैं पीछे मुड़ कर देखता हूँ?  उसने तो कहा था मुझे … Read more

मेरे जीवनसाथी  – मीनाक्षी सिंह

जब मेरा विवाह हुआ तब मेरे पति दिल्ली की एक बड़ी कंपनी  में इंजीनियर थे ! बी .टेक  किये  हुए थे ! ये काफी  स्मार्ट  लगते थे अपनी कंपनी यूनिफोर्म में बहुत  ज़मते थे !  जब मेरी सरकारी नौकरी  लगी ! हमारे  आगे काफी बड़ी समस्या आ गयी बच्चों को कौन देखेगा ! क्योंकी मेरा … Read more

सत्य की खोज – भगवती सक्सेना गौड़

आज इशिता अपने पापा की लिखी पुस्तक के विमोचन समारोह में शानदार स्टेज पर खड़ी है। पुस्तक का नाम “सत्य की खोज” है। उसके पापा का नाम स्वर्गीय करण सिंह है। जीते जी उन्हें पता ही नही था, कि उनकी प्यारी बेटी, उनके लिखे शब्दो को एक पुस्तक की मंजिल तक पहुँचाएगी। “अब गणमान्य अतिथियों, … Read more

सिर्फ तुम और कुछ नहीं” –  रचना कंडवाल

ओहो! मेजर साहब हमारी और आपकी शादी को कितने साल हो गये हैं?? बताइए न?? ऐसा कहते हुए कल्पना  मुस्कुरा उठी। मेजर धीरेन्द्र प्रताप सिंह झुंझलाहट भरी नजरों से उसे देख कर अपना फोन अटेंड करने लगे। फोन बंद करते ही उसकी ओर मुखातिब हुए और डपटते हुए बोले। अभी इस कैलकुलेशन का वक्त नहीं … Read more

तर्पण – किरण केशरे

आज कंचन के ससुर जी का श्राद्ध था , पिछले साल बीमारी के चलते उनका देहांत हो गया था,नरेश की जिद थी , वृद्धाश्रम में जाकर वहाँ सबको भोजन कराया जाए  ! लेकिन घर पर तर्पण ,ब्राह्मण भोजन आदि के पक्ष में नही था ! लेकिन कंचन का मन नही मान रहा था ! वह … Read more

अपनी ही आत्मा की हत्या – रंजना बरियार

आँटी वो महिला कौन हैं, जो बिल्कुल श्वेत, काले बॉडर की सिल्क की साड़ी पहन कर उस किनारे बैठी हैं?” मैंने अजनबी सी महिला को देखकर अर्पिता की मम्मी से पूछा। आँटी ने कहा ” वही है मंजुआ…अर्पिता के बेटे की शादी में उसका होना तो ज़रूरी है क्योंकि अंकल जाते जाते अर्पिता को कह … Read more

अपराधी कौन ? – बेला पुनीवाला

 उर्वी की शादी अभी कुछ दिन पहले ही हुई थी, उर्वी के ससुराल में उसके सास-ससुर, उसका पति उमेश और उसका एक छोटा देवर सब साथ में रहते थे, उर्वी का  पति उमेश किसी कंपनी में मामूली सी नौकरी करता था, घर में कमाने वाला सिर्फ़ वह एक अकेला ही था, उमेश के पापा  टीचर … Read more

error: Content is protected !!