मां कभी सौतेली नहीं होती – संगीता अग्रवाल
सविता जी की नजर बार बार घड़ी की और जाती वो बेचैनी से दरवाजे तक जाती फिर वापिस सोफे पर आ बैठ जाती। बेटी रिया को कॉलेज से आने में देर जो हो गई थी तो एक मां का बैचैन होना स्वभाविक था। तभी रिया आती दिखी और उसकी जान में जान आई… ” बेटी … Read more