खाली गिलास -कहानी-देवेंद्र कुमार
सवेरे का समय था, बलवान चाय वाले की दूकान पर काफी भीड़ थी रोज की तरह। वहीँ काम करता था रमुआ। उसका काम था जूठे गिलास धोना, टेबल पर कपडा मारते रहना और आस पास की दुकानों में चाय दे कर आना। उसका कोई नहीं था इसलिये बलवान को ही बापू कहता था। वैसे बलवान … Read more