स्वयंसिद्धा – शुभ्रा बैनर्जी 

“मां!मां! ये क्या सुन रहा हूं मैं?क्या हो गया है आपको? मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था,कि आप ऐसा कुछ कर सकतीं हैं।” अखिल की आवाज में निराशा और गुस्से का मिश्रण था।मुझे उसके चेहरे में कहीं न कहीं एक पुरुष का सारा हुआ अहं दिखाई दे रहा था।मेरे लिए उसका यह सवाल … Read more

मर्यादा में बंधी अलविदा – तृप्ति शर्मा

आज बहुत दिनों बाद चाची के घर के सामने उस से टकराना हो गया ,वही बाल बनाने का तरीका वही कपड़े पहनने का अंदाज और वही शरारती हंसी और बातूनी आंखों की मुस्कान। इन सब को देख कर ही निशा का मन अमित पर आया था। चचेरे भाई का दोस्त था अमित और पड़ोस में … Read more

वापसी – कल्पना मिश्रा

रीमा की फ़िज़ूलखर्ची और ज़िद्दी स्वभाव के कारण दिन रात होती लड़ाई से उमेश परेशान हो चुका था । आज रीमा से इस बारे में बात करेगा कि  अभी भी वक्त है।जो भी एक दूसरे को नापसंद हो .. दोनों ही अपनी आदतें सुधारने की कोशिश करेंगे,,,और फिर भी कोई सुधार नहीं हुआ तो बगैर … Read more

मर्यादाएं सिर्फ मेरे लिए? – मीनू झा

तलाक हो गया तो दुनिया भर में बदनाम हो जाएगी…कह कह कर मेरे घरवाले मुझे ऐसे पति को झेलने के लिए मजबूर करते रहे जो तन मन धन से कभी मेरा रहा ही नहीं…शादी की पहली रात बस इतना जरूर बता दिया मुझे–मैंने शादी पारिवारिक दवाब में की है, परिवार की बहू तुम हमेशा रहोगी … Read more

मर्यादा – डाॅ संजु झा

मानव जीवन  के खेल निराले हैं,उसमें कभी तो सुख की बरसात होती है,तो कभी गमों के काले बादल उसकी जिन्दगी को अंधेरा कर जाते हैं और वह परिस्थितियों से घबड़ाकर मर्यादा की सीमारेखा को पार करने को मजबूर हो उठता है।अकस्मात् उसकी जिन्दगी के आसमान  में मर्यादारुपी बिजली चमककर उसे सही रास्ता दिखा जाती है।  … Read more

बिटिया की जात,,, मत कर ज्यादा बात,,,  – मंजू तिवारी

बिटिया की जात ,,,मत कर ज्यादा बात,,, यह कहावत संजू अपनी दादी से अक्सर सुनती रहती थी जब वह छोटी थी घर में उसके और भी चचेरी बहने थी तो सब भाई बहनों में झगड़ा होता तो हम बहने ज्यादा बोलते या किसी से मुंह जोरी करते,,,, हम बहनों का अपनी मां से झगड़ा हो … Read more

ऐसे भी जीजा होते हैं – गीता वाधवानी

बचपन से हम किस्से कहानियों में पढ़ते आए हैं और टेलीविजन धारावाहिकों में, फिल्मों में यही देखते आए हैं कि देवर भाभी, जीजा साली का रिश्ता मजाक वाला होता है और इनके बीच मजाक चलता रहता है लेकिन यह सब एक सीमा में, एक मर्यादा में रहते हुए ही उचित होता है फिर भी कुछ … Read more

‘ बेड़ियाँ नहीं, कवच है ‘ –  विभा गुप्ता

” ये तू क्या कह रही नीरू?तू उस बेवकूफ़ के लिए अपना घर छोड़ देगी?तेरा दिमाग तो ठीक है ना?” निर्मला ने आश्चर्य से नीरु से पूछा।          “हाँ-हाँ,  मेरा दिमाग ठीक है।तू चाहे जो भी कह, लेकिन मैं तो उससे बहुत प्यार करती हूँ।अगर पापा नहीं मानेंगे तो मैं घर छोड़ दूँगी और ये मेरा … Read more

झांसी की रानी – पायल माहेश्वरी

” अरे ओ…..महारानी, मेरी झांसी की रानी, जरा तनिक भर के लिए अपने पैर जमीन पर रख लें जब देखो हवा से बातें करती फिरे हैं “…….। दादीजी का बडबडाना निरंतर जारी रहता था, लेकिन शर्मीला हैं कुछ सुनती ही नहीं थी, शर्मीला इस घर के लाड़ले व छोटे पौत्र शुभम की पत्नी हैं, वह … Read more

सोंच नई – इरा जौहरी

कुछ झटके जीवन में समयानुकूल उपयोगी नया ज्ञान देते हैं ।अभी तक यही सोंचती थी कि जीवन में स्वास्थ्य बीमा कराना बहुत जरूरी है पता नहीं कब आवश्यकता पड़ जाये ।एसे में पास में कुछ धन हो तो काम आता है । किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ता हैमम । पर हकीकत इससे कोसों … Read more

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