ये भी प्रेम ही था ना.. – अर्चना नाकरा

मेट्रो तेज रफ्तार से भाग रही थी और ‘उसी रफ्तार से साधना का मन भी” आज सुबह प्रेजेंटेशन देनी थी नहीं तो शायद छुट्टी ले लेती! वैसे, छुट्टियां बची भी कहां थी ? आए दिन कुछ ना कुछ लगा ही रहता और उसे घर रुकना पड़ता! पता नहीं कैसे’ खींचतान कर घर और नौकरी’ चला … Read more

क्या लगता है तुम्हारी मां इतनी बुरी है – रत्ना साहू 

एक तो सुबह की चाय समय से नहीं मिली उसकी नाराजगी तो थी ही उपर से बेटी को रसोई में काम करते देख और बढ़ गई। अरे प्रिया बेटा! तुम यहां रसोई में क्या कर रही हो? भाभी कहां गई?” “मां, चाय बना रही हूं और भाभी फ्रेश होने गई है। “क्या..!अभी फ्रेश होने गई … Read more

कॉम्प्रोमाइज – कीर्तिरश्मि नन्द

उसने कहा” मैं मां को साथ नहीं रखूंगा”। क्यों ?” जज ने पूछा “इस बुढ़ापे में तुम ही तो उसका सहारा हो फिर ये रवैया क्यूं”…। “मेरी बीवी नहीं चाहती उसका इगो हर्ट होता    है” लड़के ने बनावटी बात बोली। “ये भी भला कोई बात हुई ,समझाओ बीवी को” ” नहीं समझा सकता” क्यूं” … Read more

“छोटा प्रयास बड़ा बदलाव” – कविता भड़ाना

आजकल शादियों का मौसम है।  आप लोगों का भी शादी और उससे जुड़े दूसरे समारोह में आना जाना लगा ही होगा। कल रात मेरा भी दो शादियों में जाना हुआ। में, मेरी दोनों बेटियों और पतिदेव के साथ अपने करीबी रिश्तेदारों के यहां गई थी। बड़ा ही सुंदर फार्म हाउस था। बिजली की रंग बिरंगी … Read more

वाह अपने बेटे की क्या कीमत लगाई हैं© ममता गुप्ता

आज प्रमिला को लड़के वाले देखने आ रहे थे इसलिए प्रमिला की माँ वंदना उसे समझा रही थी कि… देख प्रमिला कल तुझे लड़के वाले देखने आ रहे,तो तू लड़के वालों के सामने ज्यादा न बोलना,वो जो भी तुझसे सवाल करे  सिर झुकाकर जवाब देना, औऱ हाँ तू उनसे कोई सवाल जवाब करने मत लग … Read more

तलाकनामा – डा. मधु आंधीवाल

गांव का सबसे धनाढ्य परिवार यानी जमींदार परिवार । इस परिवार की बात ही निराली । जमींदार साहब मनजीत सिंह जी के सबसे बड़े सुपुत्र राम सिंह जी जिन्हें सब रामू भैया कहते थे । रामू भैया को जमींदार साहब ने शहर भेज दिया अध्ययन करने के लिये । रामू भैया को शहर की हवा … Read more

मायकेवालों को बुला लो!! –  कनार शर्मा 

बहू दिन चढ़े घंटो बीत गए एक कप चाय की प्याली ना मिली सो गई हो या भूल गई हो… घर में बूढ़े सास ससुर भी हैं और कॉलेज जाते ननंद, देवर भी सभी तुम्हारी राह देख रहे हैं जल्दी करो… विमला देवी बोलते हुए बहू पूजा के कमरे में दाखिल हुई। आंखें मसलते हुए … Read more

दबंग मोहल्ला – शैली गुप्ता

सीमा बैग उठाए स्टेशन से बाहर निकली और बाहर खड़े रिक्शावाले से पूछने लगी, ” भैया शर्मा नगर चलेंगे?” रिक्शावाला ज़ोर से हंसता हुआ बोला,” अच्छा आपको दबंग मोहल्ला जाना है….. बैठो।” रिक्शावाले की बात सुनकर सीमा पुलक कर हंस पड़ी और रिक्शा में बैठ गई और सोचने लगी,” हां!!! दबंग मोहल्ला…..इसी नाम से तो … Read more

विरोध :अब तो मैं करूँगी – सुभद्रा प्रसाद

 “रेणु, चलो, जल्दी तैयार हो जाओ  |आधे धंटे में हम निकलेंगें |” रेणु की सास शोभा देवी ने जोर से कहा और खुद तैयार होने अपने कमरे में चली गई |              रेणु ने सुना पर वह अपने पलंग पर ही बैठी रहीं |उसे जाने का जरा भी मन नहीं था |वह अपनी जगह से जरा … Read more

एलेक्सा – –ऋता शेखर ‘मधु’

पात्र- शुभ्रा-घर की बहू रमेश-शुभ्रा का पति कल्याणी- शुभ्रा की सास उमेश बाबू- शुभ्रा के ससुर आरव- शुभ्रा का पुत्र, उम्र 10 वर्ष आरुषि- शुभ्रा की पुत्री, उम्र 8 वर्ष एक बैठक का दृश्य। बैठक में दो सेट सोफे हैं,एक बड़ा सेट गद्दा वाला। एक लकड़ी का कुशन वाला। वहीं एक आलमीरा के ऊपर एलेक्सा … Read more

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