लघुसंगिनी”  एक बूंद चाहत – रीमा महेंद्र ठाकुर

मम्मी जी “” मम्मी जी”””  अवन्तिका  के कानो में मधुर स्वर सुनायी दिया “” अवन्तिका ने आंखे खोलने की कोशिश की “” पर ताप की अधिकता के कारण आंखे न खोल सकी “ अवन्तिका “”” कौन””  कोमल हाथो ने उसके माथे को स्पर्श किया ”  उस छुअन में कुछ नये अहसास की अनुभूति हुई”” अरे … Read more

पंगु – मंगला श्रीवास्तव

राघव आज एक बड़ी कम्पनी सिप्ला में इंटरव्यू देने जा रहा था। माँ मैं जा रहा हूँ, कहकर पैर छुए फिर पिता जिनको पेरेलिसिस था उनके बिस्तर के पास आकर उनके भी पैर छूकर बाहर निकल आया था।आज उसको इस जॉब की बहुत जरूरत थी। राघव ने कभी नही सोचा था कि  कभी जो खुद … Read more

“छोटी बुआ” – सेतु कुमार 

रक्षाबंधन  का त्यौहार पास  आते  ही मुझे सबसे  ज्यादा  जमशेदपुर वाली  बुआ जी की  राखी  के  कूरियर का इन्तेज़ार रहता था. कितना बड़ा  पार्सल   भेजती  थी   बुआ जी. तरह-तरह के विदेशी ब्रांड वाले चॉकलेट,गेम्स, मेरे लिए कलर फूल ड्रेस , मम्मी के लिए साड़ी, पापाजी के लिए कोई ब्रांडेड शर्ट. इस बार भी … Read more

तलाश (भाग 2) –  अंतरा 

अभी तक आपने पढ़ा कि रोहिणी  एक वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर है और अपनी सहेलियों के साथ पहाड़ों पर ट्रिप पर आई हुई है लेकिन उसका असली मकसद कुछ और ही है और वह किसी विशेष जंगल की तलाश कर रही है..  अब पढ़ते हैं आगे…. गाड़ी जब एक झटके से रुकी तो रोहिणी को एहसास हुआ … Read more

पुनर्जन्म, — उमा वर्मा

वह मेरे पड़ोस में मेरे घर के सामने ही रहती थी ।शीला मौसी माँ की सबसे अच्छी दोस्त और बहुत करीबी थी।उन्ही की बेटी थी वह ।बहुत शान्त, बहुत सौम्य ।तीखे नाक नक्शे पर हल्का साँवला रंग उसकी खूबसूरती को बढ़ा देता था ।उसपर लम्बा छरहरा बदन किसी को आकर्षित करने के लिए काफी था … Read more

हमारी चाहत के साथ पहली तस्वीर – गुरविंदर टूटेजा

नुपुर क्या कर रही हो जल्दी तैयार हो…?? राजीव बस हो रही हूँ पर मेरा मन नहीं कर रहा वहाँ जाने का…क्या मुँह लेकर जाऊँ….?? अरे तुम्हारे भतीजें का नामकरण हैं और बुआ हो तो नाम तुम्ही रखोगी ना..!!  राजीव भैया-भाभी ने हमारे कहने पर ये बच्चा हमारी गोद में डालने के लिये किया था…पर … Read more

चाहत एक स्वेटर की – सुषमा यादव

एक साल बहुत अधिक ठंड पड़ रही थी,,उस पर पूस की हड्डी तोड़ कंपकंपाती ठंड,, एक तो करेला ऊपर से नीम चढ़ा कहावत सार्थक करती वर्षा की फुहारें,, स्कूल में पूरा स्टाफ अपने को ठंड से निजात पाने के लिए खूब पहन ओढ़ कर सिसियाते बैठा था ।। मैं भी किसी तरह पानी से बचते … Read more

गोल रोटियां – संजय मृदुल

महीना भर हो चुका था क्षिप्रा की शादी को। हनीमून, मायके जाना सब निपट चुका था। अब एक महीने ससुराल में रहना था। उसके बाद वापस मुम्बई जाकर नॉकरी जॉइन करनी थी, पवन कल ही जा चुके थे उनकी छुट्टियां नही थी ज्यादा। आज किचन में पहला दिन था क्षिप्रा का, सुबह सबके लिए चाय … Read more

छोटी सी चाहत – गीता वाधवानी

शिल्पी सोच रही थी कि जब उसकी शादी सागर से हुई थी, तब वह कितना हंसमुख और खुशदिल इंसान था और वह उसके साथ कितनी ज्यादा खुश थी। आज सागर कितना बदल चुका है। वह बिल्कुल अपने नाम की तरह गंभीर और गहरा हो गया है। उसे कोई मानसिक परेशानी भी नहीं है फिर उसे … Read more

खुशियों की चाहत – सुल्ताना खातून

आज फिर पिंकी ने रोते हुए फोन किया था। क्या हुआ पिंकी? उसके पूछते ही पिंकी फट पड़ी- दीदी आज फिर मम्मी पापा में बहस हुई, लड़ाई इतनी बढ़ गई, की दोनों एक दूसरे पर चीखने लगे,  कुछ ही दिनों में मेरे बोर्ड परिक्षा होने वाले हैं,,, मैं तंग आ गई हूं, इस रोज़ रोज़ … Read more

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