लड़कियां भी मना कर सकती है – गीता वाधवानी

आज अंजू जब कॉलेज से आई, तब उसने देखा कि उसकी दादी जी की सहेली रमा जी और उनकी बेटी राजू दीदी बैठी हुई है। वैसे तो राजू दीदी का नाम राजकुमारी था और सब उन्हें राजू ही कहते थे। उन्होंने बताया कि कल, बहुत वर्षों बाद राजू दीदी की बुआ जी अपनी पोती मीना … Read more

उपहार  –   संजय मृदुल

सुनो जी! इस दीवाली पर दूज के दिन भैया का जन्मदिन भी है कुछ अच्छा लेना है उनके लिए। अनु ने विनय से कहा। क्यों? पीछे से निलय की आवाज आई। क्यों गिफ्ट लेना है उनके लिए। साल में तीन बार तो ऐसे भी देते ही हो गिफ्ट। बदले में वो क्या देते हैं हम … Read more

सासू मां मेरी थाली पर ही नजर क्यों  – किरन विश्वकर्मा

रीतिका सारा काम करने के बाद खाने के लिए बैठी तो जैसे ही रोटी के टुकड़े में सब्जी लगाकर खाया तो उसे सब्जी अच्छी नही लगी वैसे भी परवल की सब्जी उसे पसंद नही थी मायके में होती तो किसी और चीज से रोटी खा लेती पर यह तो ससुराल था जहाँ पर अचार, देशी … Read more

बहू नाक कटवा दी खानदान की – कनार शर्मा 

वंदना हड़बड़ती हुए घर में प्रवेश करती है इसी जिसे देखकर लीला जी पूछ लगी “ये कौन सा वक्त है बहू बाजार से घर आने का”????? भले घर की बहुएं सूरज ढले घर में घुसते अच्छी लगती है क्या???? और तुम क्या लेने गई थी तुम्हारे हाथों में तो कोई झोला दिखाई नहीं देता… हम्मम … Read more

पत्थर हूं शीशा नहीं।  –  सुषमा यादव

राजेश एक उच्च पदाधिकारी थे।अपना काम बड़ी लगन, मेहनत और ईमानदारी से करते थे। अपने काम को बोझ नहीं बल्कि एक कर्तव्य समझ कर करते,, अपने मातहत कर्मचारियों के साथ वो भी अपने कार्यक्षेत्र में हमेशा जाते,,हर छोटे बड़े कर्मचारियों के साथ उनका बड़ा प्रेम पूर्वक व्यवहार रहता था,सब उनसे बहुत खुश रहते,, मंत्री, और … Read more

समझौता या फर्ज – संगीता अग्रवाल

” बेटा क्या सोचा है तूने अब क्या करेगी ?” दर्शना जी ने अपनी बेटी निशा से पूछा। ” सोचना क्या है मम्मी इस वक़्त जो मेरा फर्ज है वही पूरा करूंगी मैं !” निशा ने शांति से उत्तर दिया। ” लेकिन बेटा ये नौकरी …तुझे तो पता ही है नौकरी इतनी आसानी से नही … Read more

 मनपरिवर्तन……. – विनोद सिन्हा “सुदामा”

आ गए तुम…. मैंने अभी घर में कदम रखा ही था कि पत्नी सुधा ने मुझपर चिल्लाते हुए कहा… हाँ ….क्या हुआ… मैंने जानना चाहा… सुनो अब मैं यहाँ नहीं रह सकती… बहुत हुआ..मैं ये रोज़-रोज की झिकझिक और टोका टाकी से तंग आ गई हूँ… अब मुझसे जरा भी बर्दाश्त नहीं होता … कुछ … Read more

स्वाभिमान से समझौता कभी – सरोज प्रजापति

“मम्मी जीजा जी का फोन आया है।” ” तू बात कर मैं अभी आई । “ “नहीं मम्मी कह रहें हैं जरूरी बात करनी है आपसे जल्दी आओ।” यह सुन कमलेश जी का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा कि ऐसी कौन सी बात हो गई कि सिर्फ मुझसे ही बात करनी है  । उन्होने कांपते … Read more

क्या काजल ने सही कदम उठाया  – मीनाक्षी सिंह

रवि – काजल तुम समझती क्यूँ नहीं ,,तुम्हे तुम्हारे घर वाले बिल्कुल प्यार नहीं करते ,,वो हमारे रिश्ते के लिए कभी राजी नहीं होंगे ! काजल – रवि ,,तुम्हे तो पता ही हैं बचपन में मुझे जन्म देते ही मेरी माँ खत्म हो गयी,,पिताजी ने पालपोष कर दस साल का किया ,,तब उन्हे कैंसर हो … Read more

पत्र लेखन – नताशा हर्ष गुरनानी

पढ़ाई के बाद नई नई नौकरी लगी हजारों सपने मन में पाले थे, फिर जब स्वाभिमान पर चोट लगी तो इस्तीफे पर लिखी चिट्ठी नमस्कार सर मैने आपके यहां जब नौकरी के लिए आवेदन दिया था तो लगा था कि मेरे सपनो को नए पर मिल गए क्योंकि बहुत सुना था आपकी संस्था के बारे … Read more

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