स्वाभिमान से बढ़कर कुछ नहीं – सरोज प्रजापति
“भाभी आप खाना तैयार रखो, हम अभी बड़े भैया के घर से होकर आते हैं।” “दीदी खाना तैयार है। खा कर आराम से चले जाना। मैं जब तक सारा काम निपटा लूंगी।” “क्या भाभी, आपको तो बस अपने काम की पड़ी रहती है। अरे दो-चार दिन देर से काम कर लोगी और नहीं सोओगी तो … Read more